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Showing posts from May, 2021

सहज सबहु गुरु कृपा

सहज सबहु गुरू कृपा सौ जाना। पंगु लंङ्घ गयै वन परवत,भव जलधि तरौ कूप समाना। निपट अपढ भयै ज्ञानी पंडित,भए मूढमति चतुर सुजाना। मूक भयै वाचाल वाक् पटु,सहज पयै सब वेदनि ज्ञाना। पंथ भटकै गहै पंथ प्रेम कौ,रस अप्राप्य सहज करि आना। प्रीति चरणनि होय गूढ हमारी,बाकी योई "प्यारी"आस पुराना।

शुभता विस्तार सहित

(हिंदी लीला विस्तार सहित) ________________शुभता शुभ: किम् जानामि?_____________ . सखि सत्यं वदसि किं शुभ त्वसि? अधीर: विलम्बेतुप्रियं प्रिया: कुंजेषुबर्हि निकसि।।१।। . तत: पुनऽवस्थितै ललितादि सखिन: रमणी धीर: धरावती। तत्क्षणै प्रियां वामऽक्षिचलत्वं मधुवचनानि निजमुखै वदसि।।२।। . शुभाश्ंकै मम् नयनचलत्वं अहो! प्रियतम् शीघ्रं आवति। वाक्पटु ललितऽलि रासेश्वरी शुभता: निज पृच्छसि।।३।। . यत् श्रुत्वां किंञ्चित मंदहास: पक्ष्म्वाञ्च सुमुखि ललितौत्तरम् ददाति। मम् हितै मम् श्यामसुन्दरौ आगत: सर्वतौ शुभ: भवति।।४।। . तत् किंञ्चिदून: क्लैशं तत्त्वत: यत् वार्ता: सखिन: अति प्रसारति। ते मुरलीमनोहर: वेर्णुधरऽधरंम्नाम्नावहै मंदहसति आह! इतिहि शुभसि।।५।। . शुभता च प्रियतम: निजमृदुऽगुंलि: मधुर: स्पर्शै मम् प्रतिअंङ्गै प्राप्यति:। दृश्यागत: प्रिय: च मधुरस्पर्शं लुप्त: प्रिया: तद् एक: सखिन: पुनिहि कथं हसति।।६ . च त्वं प्रिय मनुहारौकृत्वं यद् त्वंरूष्टौ ,श्रुत्वां मधैश्याम: वदति। स: मम् शुभता अस्ति! यत्श्रुत्वां राधां नयनंसलज्जभारेनमति।।७।। . पुन: वद् श्यामसुन्दर: -- यदा "श्रीराधा:" किंञ्चितक्षणै मम् कर्ण...

श्रीगोपाल भट्ट

श्री गोपाल भट्ट प्रगटै गुपाल,रसान्नद वर्षण हेतुई। अद्भुत छबी त्रिभंग खडी,एकटक लखै भरै नैननी। श्यामल बरण अति सुघर तन,कौ अधरन नयन शोभा कही। छबी गौरश्याम एक देहि मे,दीखै लाल कबहुक लाडिली। भरि आनंद मोदनि सब सखिन,श्रीगुणमंजरी कौ आजु भली बनी। हर्षित निकुंज कुंज कण प्रति,झूमत सजै द्वार तोरणि। डफ ढोल बाजत वाद्य विवि,जय-जय श्रीराधारमण सब कही। राग रागिनी गाए मंगलम,कोऊ कोऊ रिझावै सखी निरतई। वारि प्राण तन अंतर- करण,सर्वस्व धरि दै न्यौछावरी। कहा वारै"प्यारी" निज प्राण पै,तन मन हो धन सरबस तुम्ही। . दोहा--- जुग जुग जीवौ आनंदघन,मानै योई मनौति प्यारी।  ........ करू सोई जा मै राजी रह्यौ,रहू हित तौ सुखकारी।।

हू तौ तृण

हू तौ तृण पर तेरौ। प्यारौ! हू तौ तृण पर तेरौ। होउ न होउ कछु परत न अंतर,मौ सम तौकू भतेरौ। सम आप सौ मेरै आप एक ही,संग राखौ चहै छोरौ। फिरू भटकत हौई विलग जो तौसो,होई दुर्गत जग मेरौ। बाँह पकरि लौ चरण लौ राखि,करूणा नेह सौ हेरौ। आवौ हे प्रभु !दीनबन्धौ करूणामय, "प्यारी" कब सौ टेरौ।

रहे अखंड

रहै अखण्ड दोउन को शीतलताई। चंदन बनिकै लिपटै रहै आपस,अक्षय दोऊ कौ रस केलि सदाई। बिरह ताप अति दुरूह नसावै,मिलन रितु कुंज रहै सदा छाई। सीकर शीतल रस अंग झलकै,निरखि यौ अलिन परम सुख पाई। मधुर बयार बनि बहै "प्यारी",अहा! लाल लली लए लाड लडाई।

अति झीने बसन

अति झीनै बसन धरै वपु लाल। झाँकत अंग अंग इन बाहिर,ढापत ढकै न रूप रसाल। झर-झर झरत झरै सरिता रस,छुपै छुपाय सुगंधि कौ हाल। आवै लोभ देखि मधै पट कौ,नेक उघारौ करौ ह्यौ निहाल। "प्यारी प्यासी जनम अनत की,ओरि न तरसावौ पट यौ डाल।

सदगुरु खेवनहार हमारो

सद्गुरू खेवनहार हमारै। नाम नौका लए बाह गहै कडी,बिषय बिकार भँवर सौ निकारै। माटी देह करि दई चंदन सम,सोई चंदन सेवा हित प्यारै। रस भजन स्वाद जीव्हा उर की दए,भटकै उर भए आप सहारै। अंत अनंत कहै कहा लौ जीह,"प्यारी" इन कहि गयै देव हारै।

आज बिचारत

आजु बिचारत श्री राधारमण लाल। कौन भाति निज प्रिया रिझावू,लखू लाज भर्यौ आनन लाल। राग रागिनि वेणू मधुर सुनावू,रीझत देय गलबैय्या ही डाल। भाति भेष धरि नाट्य दिखावू,करू इंगित लता लिपटी तमाल। निरत करत जानि ताल बिसरावू,आवै करन हित प्यारी सम्हाल। देखि "प्यारी" दशा अनंग हित केलि,ऊचेई उठै पिय मिलन उछाल।

श्री राधारमण मृदुल

श्री राधारमण मृदुल मुख हासी। शीतल सुखद अलिन मन भावति,सहज सरल मुख कुमुद सुहासी। अनगिन चंद कोटिक मन्मथ वारि,पै ऐसोई अतुल प्रेम रस राशि। जन्मनि अथक अनत चहै "प्यारी",रहै योई सदाई रूप रस प्यासी।

श्री राधारमण झुके

श्री राधारमण झुकै दृग नीचै। प्राणप्रिया चित्त चरण अटकि गयै,नैननि जल सौ रहै इन सींचै। इकटक चित्र छबि जावक कै,तूलिका नैन भरि रहै खींचै। बड-बड भाग बडै जानि जावक,बनि रहू बस्यौ चरण कुँवरि-कै। योई करै आस प्रियापिय "प्यारी",होय सुख ज्यौई त्यौई रस पीजै।

एजी मण भाया गोपाल

ऐजी,मण भाया गोपाल। ऐ...जी,मण भाया गोपाल। वोई मोर पखा लहरावनी सौहनी,नैननि अतिव बिशाल। श्याम बरण वोई तम तौ कारौ,मुस्कनि मधुर उजाल। कर पकरनि वोई सरस मुरलिया,पटकौ कांधौ डाल। कछुक कटिली वोई टेढी कमरिया,नाचत पग सम ताल। ऐजी बसौ यौई उर म्हारै आय,"प्यारी" किजौ निहाल।

हित वन्दे

वन्दनम् श्री हित: तव् चरणम्। अतीव् आत्मजा: श्रीनिकुंजेश्वरी:सर्वभुवनमोहिनी: वेर्णुस्वरूपम्। जगत्सकलं रसौप्रेमप्रकाशिनी कर्तुंरर्सौज्जवलस्वरूप: अद्भुदवर्णनम्। लुप्तवृंदावनक्रीडास्थलै च श्रीनवरंगीलालविग्रहै हितलौक:प्रकाशकम्। मतिमूढऽहम् किंञ्चित्वकृपाकथम् निश्चितत्रुटिहित: "प्यारी"  क्षमस्वतव्पदम्। । । भावार्थ-------------हे श्री हित हरिवंश जु आपके चरणो मे हमारा वंदन है। -----आप हमारी निकुंजेश्वरी श्री राधा जु अत्यंत आत्मीय सखी है और सभी लोको को मोह लेने वाली वंशी की अवतार स्वरूपा है। -------आप समस्त जगत मे प्रेम रस का प्रकाश फैलाने वाली और इसी रस के अत्यंत उज्जवल स्वरूप का वर्णन अपनी अद्भुद वाणी द्वारा करने वाली है। ---------श्री युगल सरकार की प्रेम क्रीडास्थली श्री वृंदावन के लुप्त हो गये स्थानो को पुन: प्रकट करने वाली और श्री विग्रह नवरंगी लाल जु को जग के हित के लिए प्रकाश मे लाने वाली आप ही है। ----------हे श्री हित हरिवंश जु मै जो कुछ आपकी कृपा से कह पायी हूँ मेरी मुर्ख बुद्धि के कारण उसमे निश्चित ही कोई न कोई त्रुटि रही होगी जिसके लिए यह प्यारी आपके चरणो मे क्षमाप्रार्थी ह...

मनमोहन मैया डरपावे

मनमोहन मैय्या डरपावै। गौरस पीयत गिरात धरनी जई,खीझी माई तऊ लाल बतावै। कीयौ उधम अबिकै लाला तनै,जेई साँची सुनि लै कान लगायै। तउ दै झोरी बाबा डारू तौय,डोलै घर-घर तो तै टूक मंगायै। नाय मैय्या बाबा मिलिहै तऊ,नाय कोउ सखा सखिन बचावै। योई सुननी मुख उतरि गयौ री,लए दौरि लला मुख अंचल छिपावै। देखि हिय गयौ पुलक री "प्यारी",मायापति मैय्या संग माया रचावै। _ ______जब लाला ने दूध पीते पीते भूमि पर गिरा दिया तब मैय्या अत्यंत खीझकर लाला से कहती है रे लाला भली प्रकार से कान लगाकर सुन ले यदि अबकी बार तैने कोई उधम किया न तो मै सच कहती हू मै तु़झे किसी बाबा की झोली मे डाल आउंगी।फिर वो बाबा तुझे घर घर ले जाकर तुझसे भीक्षा मंगवाएगा और तब तुझे न तो कोई मैय्या बाबा ही मिलेंगे और न ही तेरे कोई सखी सखा ही तुझे बचाने जाऐगे।अरी ये सुनकर लाला का मुख एकदम से उतर गया और उसने दौडकर मैय्या यशोदा के अंचल मे अपना मुख छुपा लिया है।यह देखकर प्यारी सखी का ह्रदय तो अत्यंत पुलकित हो उठा कि मायापति किस प्रकार मैय्या संग माया कर रहे है और मैय्या किस प्रकार इस मायापति को ऐसी माया रचकर डरा रही है।

बिहारिजु प्राकट्य

बिहारीजु प्राक्ट्य बाँटत बधाई निधिबन हरिदास जु। बिहार पंचमी शुभ तिथी भारी,प्रकट भई जोरी ऐकौ रूप हु। चला रै हिय उडि जा निधबन,हर्षित भए युगल संग दास जु। लुटावत नेह अजु तौ हु लुटा रै,बाँकी छबी हिय काढ चढाय दु। चटकीलौ मटकीलौ जौरी प्यारी निरखत,आनंद मगन हौय निरत करा हु। प्रकटावन वारौ नित जावू बलिही,सेवत संग गोद बैठाय हरिदास जु। मोद मनाय हिय प्रेम बहायौ,जय जय प्राणन प्यारी सखी कू।

युगल एक भये

युगल एक भए प्रकट भई आजु जुगल जोरी। रूप रंग ऐकैहु ऐक,ऐकेहु देह हौ री। कबहु झलक लाल लाडलौ,कबहु लाडली लली कौ मारै। कबहु बंशी सजावत कर सौ,कबहु कमल साजत न्यारै। मुस्कन अधर ऐकहु हौवत,ऐकहु दैह ऐक प्राण होहि। चरण शीश नवावत प्यारी,झुकावत हिय जोरी कौ ही।

हरिदास जु बधाई पद

हरिदास जु बधाई पद बधाई हौ बधाई,हरिदास जु बधाई। भई सखी मानो अजहु मैय्या,प्रकट भए बिहारी। हरिदास जाकौ नाम पुनीता,जाकौ नाम काटत भव भारी। मुदित भये देखो कैसेहु अाजु,नाचत गावत सखियन आरी। चलो री चलो हिल मिल कुंजन मा,बधाई हिल मिल लेवन वारी। सबन हिय अजु नेहा बरसत,बरसत आनंद निधिबन मा री। प्यारी पाछे सखियन जावै,जावै लेन बधाई प्यारी।

सियाराम गठबंधन

सियाराम गठबंधन नेह कौ बंधन बंध गयौ जौरी। दिवस पुनीत गठजोड जुगल कौ,करावै सखिया मिल री। सिय राम दुई विवाह करत हौ,देखत सबै नगरी। नेह कौ भूषण बसन नेह कौ,नेहा को होवै सब री। पद पूजत प्राण प्यारौ जौरी कौ,मैय्या बाबा सबही। चहु दिसी मानौ फूलत फूलै,झुक झुक आवै बदरी। रबि नभ अति झीनौ निकरौ,जौरी तेज सौ हौयो नीकौ री। दासी प्यारी बीरी देत हौ,देत जौरी कौ मुख ही।

सिया जी दर्पण

सिया जी पदार्पण सुकुमारी लली बर चली बरनै। रूप अनूप मधु सौ सुरीति,कर सोहत बरमाल हिय हरनै। मंद चलत ढुरत द्वौ नैना,पलक उठावत मुख नाय निरखै। चरण लगावत दैखनौ च्हावत,लाज सौई उठावै ना मुखै। सखी तबहु जुक्ति ऐसौ किन्ही,छूवत चरण प्यारौ कौ गिरही। झुकत उठावन ज्यौ ही प्रभौ जी,निरख लई प्यारौ मुख तबही। दुई परस्पर बरमाल पिरहाये,तरंग रंग उज्जवल सिहरन होहि। आज दिन शुभ सब आस पूराये,प्यारी आस दरस पूरायौ त्यौही

म्हारी तिहारी होर

म्हारी तिहारी होर नाथ लगी म्हारी तिहारी होर। तुम कछु देवन आवो हमहु,हम नाय लेवन कोर। तौ धावौ भर उर लगानौ,हम धावौ तौ सौ दूरी। चित्तहु चुरावन आवौ तुमही,हम राखिहै सहेज अरी। अवगुन लेवन आवौ तुम्ही,हम अवगुन नाय दैन्ही। दासी प्यारी कहै सुन माधौ,मोय चेरी रख लैन्ही।

प्रेम वितरण

प्रेम वितरण देवती सखी जौ हते झोरे जुगल। पावती जा दिन सबही बाँटती। प्रेम प्रेेम करि हाँक लगाती। कहती सबही बात रात कौ। बात पिय को सबहि सुनाती। पा जौ जावती सुन सखी री। लै संग सखियन मैल कराती। हसी कबहु ठीठोली करती। कबहु संग प्यारी रास रचाती।

आशा

आशा बरेगें मोय गिरधरलाल। बिस्वास आस मोय पूरण,दैखिहौ मोय नाय बेहाल। कबहु तो कौर प्रेम डारो,कबहु पहरू कर गलमाल। सुपन सलोनै साँच होवगै,बन्यौ पिय मैरौ सुंदर लाल। माई सुन बर मै अमिट पाया,अमिट पायौ प्यारी बैंदी भाल।

अभिलाषा

अभिलाषा माई मेरो गठजौडा कीजौ। सुनियौ रूप अनूप पहिलौ,कर कोऊ को नाय दीजौ। मटकन नट कौ अलकन रस कौ,नैना बस नाय रहियौ। हसवन लूट्यौ चितवन मारौ,अरी बोलन फूल झरियौ। अंग टौना री रूप सलौना,कौन उपमा रूप धरिहौ। ज्यौ री तौ देखै रह नाहि पावै,प्यारी बिनती माय मिलिहौ।

राम रट

राम रट राम रट,अरी मोरी रसना। साँचौ जगत नाम इकही,सब जानिहौ तुव सुपना। भव सिंधु नैन मीच तरिहौ,राम संग भव ही तरना। नाम अमोलक जगत जानौ,राम रहै नाय जग फसना। रस सागर रस देवन हारी,बात साँची रै जनना। राम राम रट बिसार न कबहु,प्यारी राम नाम रटना।

बाल हठ

बाल हठ बाल हठ रस सो रसिलौ कौ। चंद चंद माई मोहे दीजै,मचल गयौ हिय श्याम लला कौ। सुनै ज्यौ नाही देखत माई,धौस अनोखेही माई दीन्हौ। अंग रमाऊ जमुना कौ रेती,चौटि तौ सौ नाय गुथाहौ। माखन ना खावू खावन न दैहू,दूध कजरी नाय पीवौ। सबहि कहु नाय लाल माई को,नंद लाल ह्यै जावौ। रूठ बैठिहो देख्यौ लाला,बात बहू कौ माई कहयौ। बातन तुतली बाणी बलिहारी,प्यारी गोद माई बैठायौ।

सखा बैठक

सखा बैठक बैठक लगायी मिल सबै सखा। सुबल श्रीदामा बैठे दाई बाई,मधुमंगल कौ पेशी लगाई। सुन माधो अपराध पेटू कौ,हमरौ यानै भोजन खाई। आज लौ घर सौ लाय न कछु ही,जिम्मे हमरे माल उडाई। आजु दंड जे भारी पावै,पुनि जाई घर सौ भोजन लाई। चतुर सुजान भली जुक्ति किन्ही,छाछ मटुकी माट भर धाई। आजहु बरत सबहिन करि पडिहै,दंड देय कौ आप पछताई। देख हाथ पेटहु फेरे,प्यारी दंड बड्यौ भर पाई।

युगल सौंदर्य

युगल सौदंर्य देख सखी सींवा सुन्दरताई। अंग गठीलौ डगमगै पग,रोंव रोवं सुघराई। दुई कर दुई दिशिहु फहरै,दंतुली अति चमकाई। किल किल करत हसत लाला,धावत पकरै माई। नीलमणी मेरौ नाय नाय कहवै,करै अंगुरी देत मनाही। कठुला कर पुनि पुनि चूमत,धूरि अंग अंगहु रमाई। हाय मैरो कान्हा दरस बड्यौ प्यारौ,प्यारी देख लयी सिंवा ही

भय पद

भय पद तज जईयौ न प्रीतम मोय। जग मोय खेचत ओर आपनी,करे तौ सौ बिछौडे होय। नैन न धरिहौ मम हिय अधमी,नेक धरियौ किरपा तोय। बिनु आप रहि सकू न पलहु,कदै ऐसौ किरपा होय। आप रटत आप ह्यै जावू,मौ मा बच्यो न नीको मोय। हे गिरधर नाय कर छाडियौ,प्यारी प्राणन सूख्यौ जाय।

हिय सुने

हिय सुने सुणत म्हारा पिव जी म्हारौ हिय कौ। कही न कही जाणत हिय म्हारी,श्रवणा लगायौ म्हारौ हिय कौ। पल छिन मनहु टटौलत रहियौ,हौण देत न निकरत मुख सौ। भाप काढिहौ वा सौ पहलौ पूरियौ,ऐसौ कबहु मिलिहौ पिय हम हौ। बहण नैन कौ पहिलौ पौछिहौ,फिरिहौ रैन दिनन मौरै संग हौ। कायसु न वारी जावै ऐसौ प्यारी,पलकन बैठाल्यौ पिय हम कौ

विरहः पद

विरह पद दरस बिनु मौ सो रह्यौ न जाय। नैन बैर निकारतौ मौ सो,पिय काहै तरसाय। जानती पिय निरमोही हौयौ,जान रोकती पकडत पाय। सखी सहेली भई पराई,कौऊ मनहु नाय भाय। इकली रहवू पिय मगन ह्यै,संग साथ छूटि जाय। अबहु हा हा करत का हौयो,प्यारी जात रोकियो नाय।

कुँज सज्जा

कुंज सज्जा सखी री मिल कुंजन आज सजावै। लै पकरौ जै डोरी बांधौ,कुंडा दयौ अटकायौ। लिजौ पुष्पमाल उठावौ,उहा ही दीजौ बंधायौ। आल दीवाल कछु नाय छूटै,भूमि सबै पुष्पन सौ पटावौ। सखी प्यारी कितहु गयौ है री,कोऊ तो मोय बतावौ।

निकुँज शोभा

निकुंज शोभा आज सखी निरख लऔ कुंजन। कहत सुनत कैसौ बाणी आवै,सखिन सजाय कुंजन को शौभा। मानौ पात पुष्प कौ ही,कोउ निज कर सौ हौ धौभा। निकुंज सजायो एकौ सिंहासन,उपर ही एक छत्र सजाय। बनाय दीयौ पुष्पन कौ छत ही,पुष्पन कौ दीवार बनाय। कही सखी कहा सेबा करू,कछु सैबा निज दासी कौ बताय। पकर कर सखी पाकशाला लाई,जहा सखी बहु मिष्ठान्न बनाय। बहु प्रकार लाडू,माल पुआ,बर्फी भाँति भाँति बनाय। देखत सखी संग मेवा कूटिये,ओखल माही सब मेवा धराए। कूटत मेवा थाल लिजिहै,लै मावा संग लाडू बनाय। हसि ठिठौली खूब ह्यै रही,प्यारी सखीन देख हिय हर्षाय।

युगल एकत्व

युगल एकत्व भई री जोरी घन सौ श्याम भई। अंग अंग भरत दामिनी हौ,सहज दुई एक हई। ज्यौ चपला घन बिलग न होये,त्यौ बिलग न करत जई। रै मन भज तौ एक जानिहै,इन्ही लाड लडावन लई। कहत बनत नाही मुख सौ,प्यारी आनंद हिय अती हई।

श्रीहरिदास जु गुणगान

श्री हरिदास जु गुणगान श्री हरिदास गुण गा रै मना। चरण गह इन्ही कौ नित ही,मेट सकल दुख घना। सेवा अधिकार इन्ही सौ पा रै,इन्ही सौ लगाय मना। नित ही राधा कुंज बिहारी,जानिहै ऐकौ जना। इन आगै नैन बहत रहिहै,जुगल जोरी पाय इन्ही को च्ह्ना। उत्सव नित कुंजन मा रहिहै,सरबस अब इन्ही कौ बना।

कोहबर लीला

कोहबर लीला कोहबर राम सिय आये री। बिधि मंगल सब पूरण किन्ही,सखी मिल आसन एक बैठाये री। परिहास हास सब राम सौ करिहै,लजावै लई सखी दुई चुटकी री। कोऊ कहे दास राम सिय कौ,कोऊ चुप छबी को निहारे री। मौन भये मुस्कायै सहज हौ,लाज प्यारी सिय गढी जावै री। मोहै भी लै चलिहौ जनकपुर,दरस प्यारी छबी कौ पावै री।

बरमाल लीला

बरमाल लीला कैसेहु सिया बरमाला डारै। नीलमणि कछु ऊँचौ सिय सौ,कैसेहु प्यारी उचक माल डारै। बड्यौ संकट हिय जानकी हौय,मुख सौ बैन कहत न जारै। उत्त हिय ऐसेहु राम कौ हौहि,मरजादा बश झुकन न चाहरै। समुझ दोउन हिय लछमण बाता,करत उपाय भाई चरण छुवा रै। ज्योहि उठावन अनुज कौ झुकिहै,चटपटि सिय माल राम कौ डारै। जय जय जय धुनि करत सबहि,प्यारी हिय मोद अतिहि बढा रै

युगल विवाह

युगल विवाह करत पणिग्रहण रघुकुल मणि। श्याम राम सिया पीत बरन कौ,दुई शोभा न जाय बरणी। तात विदेह कर करहु धरिहै,पढत मंत्र जलहु छडिहै। कुल लाज मूरत जानकी प्यारी,रघुबर प्यारौ मरजादा शीश धरिहै। बलिहार भये जनकपुर नर नारी,मिल आरती करत माई न्यारी। मोतिन मणिक बलि कर लुटावै,छबि सरबस चित्त हरण हारी। लोग लुगाई गावत मंगल ,हियहि अति प्यारी शरमावे। ब्याह निरख युगल छबी प्यारी,प्यारी बार बार बलि जावै।

बिछोडे

बिछोडै कायसुं म्हाने करो बिछोडै जी। मिलन भयौ नाय हिवरौ भरौ है,अबहि जावन कौ बात सुनावौ। आवन आवन सुनत साल हौ,पलहु आय जावत कहा हौ। कौन आनंद बिछौडै पावौ,कौन बात आयहि जावतौ। कहा भयी कछु कहतौ सुनतौ,कौन बात हिय दासी दुखायौ। नाय जी मोय कछु कहनौ सुननौ,आय प्यारी लीजौ कंठ लगावौ

अलक शोभा

अलक शोभा अलक घुंघराली हिय मैरो अटक्यौ। कारौ घुंघरारौ कछु कांधै पै पड्यौ रह्यौ। कछु अहा देखियौ कान कुंडल अटक गयौ। लट इक नगिनी सी अधर छूवै धाई ह्यौ। कछुही अलक लटा कपोलन बिखर रह्यौ। मनहर छौट्यौ लटा मुकुट कछु निकर्यौ। ऐकौ लटा देखिहौ मुकुट मणि फसिहौ। लटक लटा एकौ मैरौ हिय कौ फँसत रह्यौ। रूप सुधा पीबत अघियै न प्यारी मना। बलिहारी अलक घूंघर वारी पै ढुरि गयौ।

अयोग्यता

अयोग्यता आप तरू कैसौ नाथ,म्हारी नाव पुरानी जी। लख चौरासी जनम पौरानी,जानौ नाय नवानी जी। बिषय बिकार कौ छिद्र होइए,भरै भव कौ पाणी जी। लहरा जलहि उठत ऊपरि,हिय डरपै जाणी जी। ता पै न मोय खैवन अहिहौ,खेवनहार हम अनारी जी। आप पतवार लै बनिहौ खिवैय्या,तबहि पार ह्यै जानी जी। मैरो भरौसौ तज नाय दीजौ,ना प्यारी नाव डुबानी जी।

विरहः पद

विरह पद नैना जी,दैख्यौ बिनु है उदास। देखि देखि थारौ प्यारौ बरसै,रौवै अगै थारौ दास। काल जगह कछु नाय देखत,बहत बारहौ ही मास। कैसो प्रेम कौ टौना डारयौ,रूकि रूकि आवै श्वास। जोई गुण अवगुण तौहै न भावै,उनकोई करियौ नास। गिरधर प्यारी को धाम बुलावौ,पुरावौ जनमा कौ आस।

दरस बिनती

दरस बिनती दरस देओ अबकी बेर हे हरि। बड्यौ दिनन सौ भटकत घूम्यौ,अब मूरखताई टरी। जनम भतेरे बिनु आप गमायौ,अबहु गमायौ नही। दूज्यै ठौर नाय भैज्यौ मौहै,दासी तुव चरणा सौ गही। कहो जौ नाथ कहि ओरहु जावौ,बिनु आप कहा मोरी बनी। प्यारी राखौ निज चरण लपटायौ,दास मलिक अजहु ठनी।

सार तत्व

सार तत्व जानि लओ सब रसहु कौ सार। राधा नाम एकौ तत्व है,या सौ कछु ना होय रहार। चारहु बेद पुराण आठ हौ,लोक तीनन जै ही सार। कोटि कलप जुग छानत बीनत,पावै राधा नाम कौ न सार। कृष्ण तत्व कौ सारहु राधा,जग सब तत्वन कौ सार। कहत प्यारी राधा नाम जप मनवा,जाकौ कोउ न पायो पार।

सेवा अभिलाष

सेवा अभिलाष शोभा बरनौ कौन मुख सौ। लगिहै सबही कछु न कछु सैबा,आवौ हमहु करवौ। कछु दैख्यी सिंहासन सजावत,कछु लडी पुष्पन पिरावौ। कोऊ कोउ चढ्यी पाटहु दैख्यौ,संग मिल पुष्प माल लगावौ। कछु कौ दैख्यौ तरू तले बैठ्यी,दीप चबूतरौ सौ सजावौ। हसत करत कछुही ठीठौली,प्यारी कुसुम माल पकरावौ।

उधौ बात

ऊधो बात उधौ! हम श्याम जानिहौ एक। काजर कोटर कारिख मिलिहै,ज्यौ छूबै हौय कारौ देख। दूध ज्यौहि पानी मिलिहै,बिलग करे आप गवाय। भाप बनी चाहै उडत जहिहै,नाही बिलग दूध करि जाय। कोख मात कौ ललना हौय,पौषण माय सौ पावै। त्यौ हम उधौ एक मोहन सौ,प्यारी एक देह जान है हौवै।

सखी महिमा

सखी महिमा जानिहौ युगल प्यारी आली। दुई खिलौने युगल इन्ही के,मनावत मनहु एक करि डाली। रूप रंग बसन भूषन सबै,धरावै एकहु सम समान करा री। नित नेह हिय कौ साध पूजावै,डारत नेह सबहि हिय जो भरा री। ज्यौ डोरी सखी हौय जानिहौ,वाकौ एक छौर लला ता एक लली हौयी। जानिहौ पुष्प युगल कौई जौ रै,सुगंधि पुष्प कौ सखीन ही हौयी। बिलग कौउ सौ करि नाय जावै,रचे बसै सखी युगल हुई जायी। आसरौ लए ऐसौ सखिन कौ प्यारी,बाता कछु नित सखिन कौ गायी।

चेतना

चेतना भजन बिनु चौपाया सम जीवन। गदहा ज्यौ बौझि ढोवत,जनम सोई भार सम ढोवन। खावत सोबत समय बितावत,नाय दूजौ करियौ काम। गिद्ध ज्यौ ललचात माँस कौ पाछै,त्यौ बिषयन होय सकाम। शूकर ज्यौ मिष्ठान्न छाडिहै,धरत मुख गंदले जल होय। त्यौ बिनु भजन सुनि री प्यारी,इहा उहा लोक सबै खोय।

रोम रोम पिय

रोम रोम पिय ह्यै रहयौ रोम रोम पियजी,ढूंढवै जावू कितहु काय। बौरि भयी ढूंढत ढूंढत मै,जग फिरू ढूंढत सारा। नैन किवाडी गिराय दैखिहौ,हिय बैठ्यौ पिव प्यारा। सुनत बैन श्रवणहु तरसै,कबहु बात न सुनीही। मिलाय लई हिय एक करिहै,बंशी को धुनी बजीही। जग कहवै मै हू बौरि,मै कहवू जग बौराय। दूर देस जावन कहा पडिहै,पिय हिय आय समाय। नैन मिलाय जबहि बैठू,प्यारौ बैठ्यौ दीखै। प्यारी मुस्कन तन मन वारै,पिय बसिहौ हिय कौ नीकै।

बिछोडे

बिछोडै कायसुं म्हाने करो बिछोडै जी। मिलन भयौ नाय हिवरौ भरौ है,अबहि जावन कौ बात सुनावौ। आवन आवन सुनत साल हौ,पलहु आय जावत कहा हौ। कौन आनंद बिछौडै पावौ,कौन बात आयहि जावतौ। कहा भयी कछु कहतौ सुनतौ,कौन बात हिय दासी दुखायौ। नाय जी मोय कछु कहनौ सुननौ,आय प्यारी लीजौ कंठ लगावौ।

बिनती पद

गुरूदेव बिनती पद पूजै आस तो पूजै गुरूवर। मै मूरख लोलुप अति भारी,दये मिलवा तौ शीश धरू। झूठै प्रेम बड्यौ जताये,बिन काज नाय बिनती करू। मैरी बनावै तबहि पूजू,बिन बनाये ना जानू गुरू। बहुत दिना सो भरमत रहिहै,आज देख्यौ सूरत साँची। नाय हौहिहै प्यारी ऐसौ,बिनु सुवारथ कोऊ नाय जाँची।

अभिलाषा

अभिलाषा सखी हम कबहु भये ब्रज रज। कबहु हम ब्रज माही डोलै,बन बाँवर सब तज। हमपेई नित संग पग धरै,जुगल जोरि रूचि रच। उडि उडि अंग सबै लगै,लगिहै बसनहु रच पच। निरत करत कबहु लाल लाडिली,धिन ता थिरक थिरक। लागे पाम छुटावे नाय,खावै लाडिली लाल लचक। ब्रज संतन अंग रचि जावे,जो गावे राधा नाम सतत। लाल लली बनाईयो रज सोई,प्यारी बिनती चरणा करत।

ब्रजरज महिमा

ब्रजरज महिमा बडभागिन रेणुहि ब्रज कौ। बडभागी जा पै नंदलला डौलत,करत किलौल सखा लौ। बडभागी सोई लता पताही,बडभागी वृक्छ पुष्पन हौ। बडभागी सोई धेनु पक्छी,डोलत सोई रेणु लौ। बडभागी कलिंद नंन्दिनी,जा मै बिलसत हौय जौरि हौ। बडभागी ग्वाल गोप बाला,डौले आछे पाछे नित जोरि सौ। ऐसेहु बडभागी धाम वास ही,भावै नित प्यारी कौ।

टेर

टेर मैरी बेर कौन बैडी पाँव पडी। आयौ नाय माधवा,हौ कब की खडी। आवत रोज खान,करमा खाचडी जी। भिलनी को बैर चाखे,नाय देखी जात ही। खाये विदुरानी छिलकौ,केलो फैक दी। सबही को लिजै आय,हमार सुनै नाय। प्यारी बडै दिनन ही,बैठी टेर लगाय।

शिक्षा

शिक्षा राखौ धन कृपण सम जौरी। सात तिजौरी भीतर राखै,ता पै चैन न पावै। बैरि बैरि काढि देखत,कोउ भरौस न लावै। ओरन सौ छिपाय राखै,आप छिपायै देखे। ऐसेहु जौरी जुगल प्यारी,हिय ताले भीतर राखे। ज्यौ कृपण धन घटिहै,चिन्ता ही मरी जाय। त्यौ प्यारी जुगल होय,बिनु निरखै चैन न आय।

युगल दूल्हा दुलहिन लीला

युगल दूल्हा दुल्हिन लीला नव दूल्हा नागर हौ दूल्हिन नागरी। सेज सखि सबै मिल,फूलन सौ सजाई री। जोरी दूल्हा दुल्हिन कौ,लावत बैठायी री। बसन कोऊ संम्हारती,कोऊ बीरी लई ठाडी री। लेवत बलैय्या कोउ,दोउ हिल मिलावल बाढी री। प्रीत दुई रंगै पगे,प्रीत को खिलौने री। प्यारी झौरे बैठी ताई,नजरा उतारै री।

कृपा विनती

कृपा विनती कृपा करो आपनी ओरहु देख। मै मतिहीन,कुमति अधम हौ,आप अकारण करूणाकारी। भवसिंधु हम जानत न तरनौ,आप कुशल खेवनहारी। हम शूकर विष्ठा मुख मारत,आप सुधा पिवावनहारी। विषय विकार हमहु बड्यो भावत,तुम इनसो छुडावनकारी। दयामयी करूणाकर प्यारौ,कैसौ कहवै किरपा आप प्यारी।

स्वप्न पद

स्वपन पद सुनि सखी श्याम को आवन बात। सुन्दर रूप मनोहर देख्यौ,देखी सखी कल रात। औचक पडी सुनिही सखी,मोहै कही जो श्याम सखी। ऐको कर सो कटि पकरि,एकौ कूच मोरे रखी। कहै सुंदर गोपी बडै दिनन कौ,राह तेरी दैख्यी। आजु हाथ आयी मैरौ,आयौ घडी शुभ बड्यी। कहत कहत री सबै टटोल्यौ,कर हर ओर धरी। ऐसी मनहारी लीला प्यारी,नैन कदसौ धरी।

प्रतीक्षा पद

प्रतिक्षा पद सुनि सखी श्याम को आवन बात। सुन्दर रूप मनोहर देख्यौ,देखी सखी कल रात। औचक पडी सुनिही सखी,मोहै कही जो श्याम सखी। ऐको कर सो कटि पकरि,एकौ कूच मोरे रखी। कहै सुंदर गोपी बडै दिनन कौ,राह तेरी दैख्यी। आजु हाथ आयी मैरौ,आयौ घडी शुभ बड्यी। कहत कहत री सबै टटोल्यौ,कर हर ओर धरी। ऐसी मनहारी लीला प्यारी,नैन कदसौ धरी।

श्रृंगार पद

श्रृंगार पद लूट लए अधर मेरे मन कौ। छबि देखीहै जबहि मलूक,नैन दुई अधर ही टिकै जात। रस बरसाते मानौ खैचत है,मेरौ हिय कौ अती ही बलात। हिय धरकत है जिय डरपत है,रह रह जावै हिचकौल खात। सरबस चोरन को चोर जेई,कोऊ बढके नाय जौ देवे मात। आवत ऐसौ दबै पाम सखी,जैसौ बढी रैन कोऊ चौर आत। ता पै बिनु या कौ सरतौ नाय,प्यारी या कौ ही दिन रैन च्हात।

स्वरूप पद

स्वरूप पद कैसो कहू,जा छबी की री,मन माही बस्यौ मनमोहन हाै। पहिलै अटक्यौ नैना हिय,दूजै अलका घुंघरारी हौ। अरी नैन मैरो अटक्यौ जातौ,अधर रसीलै लाली हौ। कछु बात मौरी बिगार दई,याकी सुघर नासिका प्यारी हौ। कर कंकन किंकिनी सुनत ही,मन नाचे मयूरा भारी हौ। नुपुर रूनझुन शबद पै ही,नाचे मन मगन आली हौ। अहो,बौल सुनत तो मरि जईहै,कहौ बचावै कौन प्यारी कौ।

बंशी उलाहना पद

बंशी उलाहना पद सखी बैर भरी बंशी प्यारी। मधुर नाम पुनि पुनि टेरत है,मोरे हिय जरे को जरावत री। लै नाम मेरो मीठी बोली,कबहु खेचत अपनी ओर अरी। कहा जाय छिपू बचवे या सौ,नाय सुनि सकू तीखे बैनन री। सुधि बिसरावे जब बात सुनू,मोरा बिगर गयौ सब काज अरी। चूल्हा चौका अरू भरतार मैरा,अरू बिसर गयौ सबै बंधु री। जे बैन भरी बंशी प्यारी,लै गयौ चित्त कौ चौरा चैन अरी।

नयन शोभा वर्णन पद

नयन शोभा वर्णन पद मधुसिक्त मनोहर रतनारे,उन नैनो की अहो क्या कहिए। कोऊ लता पता सम उरझावै,इन शरण न गहे तो क्या गहिए। मटकन सुघराई नैनन की,बैनन की पूछो बात नही। चंचल चितवन चतुराई प्रिये,संग धारा इन को क्या बहिए। पलकन मानौ सैनानी है,दुई बैन भरै इन नैनन को। ऐसै मतवारै नैनन पे वारै,कछु बात कहो अजी क्या दइए। जब सो लखै नैनन कोर सखी,सुधि जन धन नाय आवत है। कछु रहे कछु नाही अरी प्यारी,तज नैनन नाही कछु अब चहिए

हिय बिनती पद

हिय बिनती पद रे मनवा गोविंद माधव बोल। नाय काहु सो मोल मंगानो,नाय चुकानौ कोऊ मोल। कोऊ को नाय जी रंग चढानौ,नाय चढानो कोउ को खोल। मुख सो मूरख कह रे पापी,नेक गोविंद मुख सो बोल। जौ सोचे सौदा मुहंगौ लागै,नाय महगौ दरस कौ तोल। प्यारी मना गोविंद गुन गा रे,गा बजा बजा कर ढोल।

निकुँज शोभा पद

निकुंज शोभा पद निरख सखी रंग कक्ष शोभा। खुलत पट ही जावत देखी,मिल सखियन संग जाती। द्वार सम्मुख दर्पण अरू चौकी,जोरी श्रृंगार करत हाती। दहिनी ओर जावत ही देखिहौ,सैज सजी पिय प्यारी। ता के बाम निरख लीजियौ जी,चौकी बीरी अरू झारी। सेज सजे अरी निरख लयी,जोरी ओढत ही रजाई। भई भौर सखि प्यारी सब मिल,जुगल जोरी जगावन आयी।

लीला दर्शनः पद

लीला दर्शन पद जगे भाग बुलायी लली सेबा माही। दौडायी कुंजन सबहि सखी,प्यारी बुला लायी। आवत बात पूछी प्यारी,लली कह मुस्कायी। लाल सखी बीरी च्हावे,तुमसो कर लगायी। सुनत हँसत दोरी सखीही,झट बीरी दिन्ही मुख माही। लली कहो तो सो बीरी लगावू,लाल ना नयन मटकायी। अधर धरत बीरी बाँटी,लली अधर पान करायी। बलि बलि सखि इन्ही प्यारी,जिन ढूंढत मोय लायी।

चेतावनी पद

चेतावनी पद शीश धरी गठरी छाडि जरा। भाति भाति नेह बंध जोडिए,शीश गठरी बाँध धरा। विषय काम मद मोह बांधिए,शीश सजा लीन्ही। प्रेम चोगा धारि उपर,तिलक भाल दीन्ही। पीट ढिंढोरा प्रीत झूठी को,अपनी ही किन्ही। ऐसे प्रेमी भरमत आपे,जग भरमत लीन्ही। च्यो रे प्यारी मूरख जग मा,नट सी निरत किन्ही।

खिझाई पद

खीझाई पद दीजियौ हिय ही मैरो लौटाय। बहुत दिनन मोय आप रिझायौ,खुलि गयी हिय गिरह। बात काँच सम साँची जानी,पायौ प्रीत प्रसादी विरह। घसी जिव्हा पिय पिय टेरतो,मिलन पिय नाय आय। कहै सखी सुनि मौ सो ता पै,प्रीत कोऊ को जाय दिखाय। ज्यो काची भाजी होय आधी,अधपकी छाडी मौहे। सुहागिन नाय अभागिन छाडी,प्यारी वरी ना जगत को दोहे।

उलाहना पद

उलाहना पद हरत हिय हरि न पूछी बात। रूप रसिक रस रंग दैखिहै,हिय लीन्हौ ललचात। नैन सैन बस कर रखिहै,अबहु नाही जानात। ज्यौ यौ अली सम पिय जानती,रोकती हिय बलात। कहा करिहै कहा कहिहै का सौ,अब गयी आयी हुई बात। हिय फैरियौ प्यारी कौ गिरधर,नाय हमरै बस प्रीत हात।

लाल सँग ठिठोली पद

लाल संग ठिठोली पद आजु लली तोहै बनावू नंदलाल हौ। जनमा को कसर निकारू नंदलाल हौ। सर दऊ चोटी,कटि कंचुकी धरावू। झूठौ सो कूच,फल कंदब लगावू। तौहै लहंगा धराउ खूब घूम घमाल हौ। लाली कपोल तोरे,अधर लगावू। अंजन नैन मा,रेख सजावू। टीका माँग को धराऊ जडवाल हौ। कंकन हाथ तेरो दोउ सजावू। पैजनिया पग नुपुर सौ सौ जडाउ। चूनर औढाय तोहै कर दउ बेहाल हौ। बनाय सखी झौरे अपने बैठावू। नीको सो घूंघट तेरौ हटावू। सिखाय दउ तोय आजु लाज लजाल हौ।

सियाराम विवाह पद

सियाराम विवाह पद आजु सखी दिन मंगल भारी। सिया राम भए एक प्राण हौ,देखन हम जा री। भीड अवधपुर बड्यौ सुहानी,हमहु संग देखी राम जानकी। ज्यो कुसुम कोउ भ्रमरा होये,त्यो शोभा कहत न प्रान की। हल्ला बड्यौ री जनकपुर होयो,दूल्हा चारो भैय्या। दुल्हिन सबही बहिनै बनिहै,सबहि लाड लडावै पितु मैय्या। देन बधाई लोग लुगायिन आवे,आवे अवध नर नारी। जनक राज खूब दान लुटावै,लूटत प्रजा सारी। मंगल बेला मंगल दासी,मंगल हिय मोद सुहाये। मंगल ही नैनन प्यारी कौ,जिन जौरी दर्शन पाये।

बिनती पद

बिनती पद दिनु दिन बाढे अनुराग। चित्त जात कहा बिनु काज फिरै,झोरे जुगल जोरी को भाग। बिनु राम कहे नाय तोय सरे,कहै काल्ह काहे न आज। जानत ह्यै तौ भी मनवा,बचावौ उन ही चरणा लाज। अबहु समय चित्त जाड याही सौ,कोउ ओर ठोर नाय भावै। जतन करिय कोउ ऐसो प्यारी,चरण रति या को पावे।

बिनती पद 2

बिनती पद प्रणमऊ चरण जोरी। चापत रहू नित लाल लली पग,प्रणमऊ बारंबार। करू बिनती कर जोड शीश धर,करत हियही बिहार। कुंज निकुंज बन मधुबन बनाय,पधारौ जोरि सरकार। बिनु आप सबै स्वपन सुषुप्ति,होवै जीवन मरन बेकार। चरण सेवा नित प्यारी दीजौ,नित करू जय जयकार।

श्याम रँग

श्याम रंग मेहंदी हल्दी रंग चढैस्यु नाहि उतरै रंग मैरौ श्याम जी। तन पिय कोउ चाहै होवै,मन पिय एकौ आप जी। रंग रंगाय दैवै जग चाहै जैसौ,रंग छूटिहै नाहि पिय श्याम जी। जानत जग झूठी कहू ना बाता,चढै दूजौ रंग नाय श्याम जी। मैरौ प्रीत सुहाग धनी जैई,जैई भयै मैरौ भरतार जी। आय बेगि दासी अपनावौ,बैठि आस करत दिना साँझ जी।

सेवा मिले

सैबा मिले कबहु जगै भाग सेबा मिलिहै। लै तूलिका चरण सजावू,जावक महावर साज सजावौ। माल पुष्प अभिसार सजावू,नागर नागरि अंग मिलावौ। देरि करत लाल ढूंढत जावू,लाय संग राधिके बिठावौ। नृत गान सुमधुर बीणा,नित नव सुनाय जुगल रिझावौ। करत भौज चवर ढुरावू,दौरि दौरि रूचि भौज परौसौ। मीठौ रसीलौ बीरी लगावू,जुगल जौरि मुखै रखावौ। करत ऐसौ भावराज टहल कौ,हिय अति चटपटी लगावौ।

प्राणन प्यारी

प्राणन प्यारी मम स्वामिनि प्राणन प्यारी। राधिके गौरी नवल किशौरी,करिहौ कृपा वृषभानिके भौरी। दीन जानिहै चरण लगावौ,टहल दीजियौ मौहि तौहरी। कान पड्यी कौ नाहि बिसारौ,सुनिहौ बिनती अधमन कौ री। जुगल जौरी मौहि सैबा दीजिहौ,कर रखिहौ निज चरणन चेरी। हौ तौ अधमन हौ तिहारौ,बिसरावौ नाही आपनौ प्यारी।

मनाय लेवूं

मनाय लेवू कौन उपाय करू मनाय लैवू गिरधर। कहौ तो कछु मौल मंगावू,जोई कहौ आप बिकावू। मानो जौन सोई काज करू जी,जतन करी कोऊ मान मिटावू। ऐसी कैसी प्यारौ भूल भई,सुनत ना ऐकौ बात हमारौ। कौन प्यारी कौ तुव बिनहौ,कैसौ नाही हिय कौ पीर दिखावू। कौन संग जौरी तौर दासी सौ,कौन कौ कारज हिय जरावू। आय मिलिहौ अजहु प्राण प्यारौ,गिरत चरण पिय बारी पुकारू।

मौन भयो

मौन भयौ मौन भयौ काहे प्रीतम प्यारौ। चुप कैसी लगाय बैठिहै,काहै कहो न बैन कछु मारौ। हसिहौ नाहि बौलिहौ नाहि,रार करनहु आय पधारौ। टेरत बंशी धुनि काय नाहि,काहै ना रचावन रासहु आरौ। अजी! गिरधरजी सुधि लैवौ,बिगडी दासी प्यारी कौ सँवारौ।

अनोखे किलोल

अनौखै किलोल करत अनौखेहै किलोल लाला। दूध पिबत शौभा छबि कौ अनोखेहै देखी। उपरि लगत दुग्ध मूंछ बनिहि मैय्या हैसि। लाल अधरि श्याम मुखै श्वेत दुधै शौभा ऐसी। फिरत चटोरौ चाटै जिव्हा उपरि लैसी। कर सौ पौछिहै लाल झूठै मूछिहै कैसी। ऐसौ मोहनि मूरत निरखि मैय्या हिय मोद बिलसी। दासी हिय ऐसो प्रेम लाला दैहो कदसि।

प्रेम

प्रेम कारण होय टूटिहै नाय,प्रेम सोई जानिहै। सुखी लाल सुख होहिए,प्रेम सोई मानिहै। प्रेम फल पकिहै हिय द्रवै,सोई नेहा उपजौ जानिहै। नेह बढिहै मान होहै,बहिर मान भीतर प्रीत धारिहै। मान होय प्रणय आवै,बिस्वास पिय प्यारी अतिहि गाढिहै। रागहु प्रणय बादहौ आवै,अतिहि दुखै सुखी होय राहिहै। रागै बदलै अनुरागै होहि,नित नव माधुरी प्रीत दीखाहिहै। अनुराग गाढिहै महाभाव होय,भेद लाल लली मिटाहिहै। रीति प्रीत दासी कहिहै,रसिक बाणी लिखै शीश झुकाहिहै।

पीर मिटे

पीर मिटै हिय जरयौ कैसौ पीर मिटै। दीखै नाहि पिय दूरि दूरि लौ,करत करत मनुहार छकि है। हसनौ कदै नाहि मोहै भावै,रौबत रौबत नैन दुखै है। रहतौ उदासी रैन दिनु हौ,पूछिहै जग तौ कहा कहि है। कैसौ कहवौ पिय नाय आवौ,पिय कौ बनि सौ मौरि बनी है। करिहौ कछु तौ दासी पै किरपा,बिनु दरस प्यासी प्यारी मरिहै।

कारौ चंद

कारौ चंद माई ब्रजचंद!दिनु दीखै। कारौ चंद कैसौ गढिहौ,हिय निकिरै नाहि निकिरै। नैन रोगी कारौ रौगी,दिनु बिसरौ रैन बिगरै। देखि जबसौ बौराई,रौवू रौवू घरै बिसरै। कौउ टौना डारि दिन्हौ,कारै धसिहै कैसौ हियरै। जावू बैद्य कौउ झाडै,देवै जौगि भभूति कोउरै। भौरी गौपी नाय जनिहै,जै जाकौ लगिहै नाहि उतरै। करौ किरपा प्यारी चढिहौ,बसौ जौरि आन हिवरै।

डारौ गुलाल

डारौ गुलाल आवन मूठ भरिहै रंगिलौ डारौ गुलाल। हुरियारै हौ हौरि कहत आवै,कर दई ललिहु लाल। कनक कंचुकी झीनौ चूनर बिगारै,बेंदी लाल भई भाल। अबर जबर मुख कपौल लपैटै,दई रंग सरबसहु डाल। नाहि कहतौ औरि जौरि बिगारी,कसी चुनरी सखि बेहाल। रंगिलौ रंग रसियाहु प्यारौ कौ,सखी छकाई लगाय गुलाल। ऐसौ हौरी बरजौरी कौ,दैख प्यारी भई निहाल।

प्रीति रीति

प्रीत रीती प्रीत रीती किशोरी सिखा दीजिए। नेहा जग सो हटे प्रीत तुव सो जुडै। कोउ नाहि दीखे नैन जौरि बसै। ऐसी भिक्छा प्रेम की कृपा दीजिए। आस सबसौ तोर संग तौरे जौरि। पड्यी चरणन माहि नेक नाहि उरि। करि दासी प्यारी बिठा लिजिए। बिन नाम नाहि टूक श्वास आवै। श्वास आवै तबै जबै नाम आवै। ऐसी अास सुनिहै पुरा दीजिए। मम प्राण अधार बनौ लाडली। दासी अपनौ महल कौ करौ स्वामिनी। रति प्रेम टहल सौ जुडा दिजिए।

बहै नैन

बहै नैन देखि किरपा बहै नैनहु गिरधर। बिनती करती अकुलात दैखि,दैखि गयी नाहि तौ सौ। आय मिलिहै तुव हियही,ढूंढत रहही इत उत सब लौ। कैसौ कहहु निरमोही तोय,बेरि बेरि करि किरपा सब सौ। गिरत नैन सौ अश्रु एकही,बेगि आय संभारिहो हम हौ। हाय! बावरी ढूंढै कहा तौ,पिय बैठे तेरो ही हिय सौ। ऐसौ प्यारो पै प्यारी बलि जए,जावै बारि बारि किरपा लौ।

रबि उगत

रबि उगत रबि उगत पूरब दिशिही,दुई परछाही बिटप तले बैठी। लाल जमुना जल डूबै रबि,मिलत रही नेक हिरत न ऐठी। छाती टिकाये सिर नैन मूंदै,प्यारी पिय सबै बिसराई पैठी। मुखै शीतल शांत दुईन कौ,रोम रोम कूपै प्रीत बहती। भेद दीखै नाही दोउन मे कौउ,छबि दुई एकहु हौहि बैठी। उठत ज्यौ ज्यौ भानु जलै उपर,सुंदर दरश जौरि सौ पाती। दीखत गौर श्याम होहि अंतर,लिपटि दैखि जौरि संग राती। जै जै करत सखिन दासी,प्यारी जौरि जय जय मनाती।

गोद लयी बैठी

गोद लयी बैठी गोद लयी बैठी जुगल चरण सखी। भावित हरषित अतीहि हुयी,पुलकित नयन बहत रही। गौर श्यामल चरण दुई,जावक पायल सजत रही। चूमत धरत माथ कदै,कबहु पलक सौ झारत रही। कोमल बसन पलोटत भयी,चरण अति कोमल सेवत रही। भाग ऐसो दासी जगिहै,कबहु दरस पिय प्यारी पही।

मन एकम एक

मन एकम एक जो तुव चाहौ सो हमहु चाह,मनहु ऐसौ एकम एक कर दीजै। रखिहै लीला नित पात्र कोउ मोय,लता चाहै पशु पक्छी कोउ कीजै। रहत करत महल निज टहलहु,सेबा हित नित कर जोरि लीजै। हसि हैरै कर शीश स्वामिनि धरै,ऐसौ प्रेमाशीश मुदित होय पीजै। हा! किशौरी जौरि प्रीत मौरि सुनिहै,चरण शरण निज दासी कर लीजै। हू अधमन तजै लोभ सेबा जाय नाहि,तव अधमन बिसारि नाहि दिजै।

कृपा कौर

कृपा कौर मनहु दैखत नाहि काहै कृपा कौर हौ। काहै नाहि रहत बनत दीन हीन हौ। बिनु काज कौर कृपाहु कीजिए। ऐसौ कौन नाथ अनाथ हमहु कौ। रसिक रसिली रस प्राण रसिकनि। स्वामिनि भौरी गौरी राधिके किशोरी सौ। बिनती करत नित रहत चरणन ठौर। पलहु नाहि तजु कृपा निज जौरि सौ। अधमनि होत ताहि लखत न अवगुण। पड्यौ रहि चरणन ऐसौ रस प्रीत जौरि कौ। दासी कर जोरि करै बिनती कृपालु सौ। निजही दासन मे रखिहौ प्यारी कौ।

नैन

नैन नैन नौका नैन सिंधु नैनहु पतवार,डूबिहै तरिहै नाहि निकरिहै पार। जोई लगै सोई सुफल जनमा,नाहि दैखिहै जीबन मरन बेकार। हिय लगै जाकै कटार नैनन,हौवै सबन औषध बेसार। मछरी नोक नुकीलै दुई तीरै,धसैे ऐसौ नैन हियहौ हमार। छुटिहौ नाहि पलहु छिनहु,नाहि बिसरईयौ जानि कुसार। सुनिहौ बिनती रस रसीलौ प्यारौ,गाढै रहिहौ जियकौ कटार।

हरौ पीर

हरौ पीर हरो हिय कौ पीर गिरधारी। मेटौ बिरह मिलवै आवौ, फिरू कद लौ बिरहा मारी। मंद मुस्कन सौ हेरौ अजहु,टेरो बंशी अधर धर प्यारी। आवौ बेगि करि प्रीतम प्यारौ,संग लेवन आवौ बनवारी। बिनती करि करि हारिहौ दासी,काय सुनिहौ ना अरज हमारी।

आवन सुनिहौ

आवन सुनिहौ आवन सुनिहौ कदहु पिय कौ,दिनु काट्यौ नाहि कटिहौ सखी। कहि आवन भूलतौ पिय,प्यारी कैसौ बिसराई सखी। खैलन खैल आवतौ जावतौ,प्रीत निभावन संग रहस्यौ कदी। नैन दरस बिनु ठौर न पावौ,हसि हैरौ पिय प्यारी अजी। जीवतौ रहवू कैसौ दरस बिनु,आवौ दरस दिखावौ हरि। लूनी छाडी जग भरमास्यु,कर पकरि संग चाल्यौ पी। एकौ आस पिय तुमसौ राखू,जग आस तोडी जौडी तुम्ही।

प्रेम पथिक

प्रेम पथिक प्रेम पथिक सौई जानिहै,जोई सब कछु देई बिसार। अपनोई इनकोई कछु नहि,जौ कछु होय तुम्हार। हसि हसावै कृपा जानिहै,रौबतौ हु किरपा रहिहै बिचार। जग राखै रोयै रहहिए,संग जावन कौ तैय्यार। टहल महल रंग रास कौ,दीजै सबै त्याग बिचार। ऐसेहु किरपा दासी पै,बेगि करिहै जुगल सरकार।

रँगीली बैठिहो

रंगिली बैठिहौ रंगीली!बैठिहौ अभिसारिका बनिहि। सुझाहै ठौर कुंज,आवत दैखिहै नाहि। रैन अधिहि होहि,देखै मग अधीरही होहि। चिह्न मिलिहै इहाहि,मोहन कित्त सौ आयौ नाहि। मान बढ्यौ आवतौ,मुख फैरिहै बैठि मानिनि भहि। आवत सैन समुझात सखी,कौन उपाय लाल लडाहि। थक हारै नाहि मानै,सखी बचन पूरौ करनौ कहि। संधि मिलन प्रेम कराय,निकुंज सैजि सखि गहि। ऐसौ ही मान प्राण चलिहै,नित नव मधुरै लीला हौहि।

लड़ैती मैया

लडैती मैय्या देखत लाल लडैती मैय्या। गोद बैठाय दधि मथति,नैन बचाय चुराय कन्हैय्या। बात बनावतौ लौना सौ मिठौ,कर डूबाय दधि हंडिया। अरी मैय्या देखि लऊ नेक,माखन कैसौ भलैहौ बनया। जानत हौ भली बतिया तौरी,तू दधि माखन को बड्यौ खवेय्या। साँची कहू नाय नेक झूठी हौ,माई काज तैरो बैगि करेय्या। तू काढै मै चखतौ रहवू,माखन ठीक सौ बन्यौ बतैय्या। तैरी सौ मैय्या मौरी भोरी,तैरे हित ही सबै काज करैय्या। जा रे जा दारी के तेरी,झूठै ही सौ मातु खावत रहैय्या। नैन अंध मौ सम अधमि कौ,दैवन वारौ जैई लाल लडैय्या।

चँचल किशोरी

चंचल किशोरी सरस किशौरी अजहु हिय चंचल भयी। सखी पहरावन पहरानी आपुनी,घूंघटौ काढि दयी। निज सैजि बैठायी प्यारी,आप घेर कुंज लयी। आवतौ मौहन पाछै पकरि,सखी लजा दूरी भयी। जानत हौ सखीहि हौहि,तबहु छाडत नाहि रही। मुख जबरन हौ चूमतौ,सखि सुधि बिसरात गई। कैसौ प्रीत लाल लली,सखी मानत नाहि दुई।

बैद्य क्या जाने

बैद्य क्या जाने बैद्य पकड क्या नबज जानिहै,जानै साहिब मौर। प्रेम रौगि दासी साँवल कौ,हिय चरणन पायी ठौर। कौन दवा करै काज रौगहु,कौन बढ्यी मिटावै पीर। दरद बढै बढै पीर रैन दिन,लावौ ऐसौ बैद्य कौऊ बीन। बस कौऊ कौ नाय चलै म्हारौ पै,दासी साँवलिया आधीन।

सखी देत बीरी

सखी देत बीरी सखी देत बीरी कर रोकी जौरी। जौई अति प्यारौ पहलौ सौई मुखै दीन्ही। पूछिहै कह सखी कौन सौ सनेह अति किन्ही। हसि हैरि सखी बीरी लली मुखै धरीहि। रसहु रसिक तुम्ह रसिलि सौई पाईहौ। सौई काज पहिलि बीरी लली हु तै दीन्ही। तुम्हु भयौ रसै जिनकौई रसिलौ । अधर रसै पिबतौ छकत न थकत हौ। ऐसैहु रसिक की रसिकनि बीरी दीन्ही।

कुँज क्षेत्र

कुंज क्षेत्र कुंज क्षेत्र रसराज नित नव चाव जौरी हिय जगावतौ। एकौ तमाल कनक बेलि लिपटि रस तरंग कैसौ जिय उठावतौ। सर कुमुद नील कमल खिलिकै पीत कमल भ्रमर मंडरावतौ। जल चाव नयौ मिलाय छबि दुई दुईन कौ एकहु करन चाह्वतौ। पंख पिच्छ मयूर नृतन सुंदर कैसी लटकनि कटि स्पर्श सुधावतौ। पुष्प अनार रक्त दैखिहौ अधर पिक रंग अधर मिलन जावतौ। कणि कणि मिलानौ सहज टहल रस बढावन लगिन रहवतौ। होय ऐसौ कुंज रसराज कणिका दासी टहल मिलन करावतौ

राधिके प्रीत बही

राधिके प्रीत बही धीर धरिहि राधिके, अजहु प्रीत बही। उमगि सिंधु ढुरि लाल पै,रसलाल लाल भई। चितवनि रस सिंधु सरिता,चित्तचौर नैन लई। अधर रससार सिंधु कोटर,रसराज अधर दई। कटारि नैन तिरछी चलिहि,उर लाल बिहर गई। छाड लाज बिसरि सखी,बरस उर प्यारी पई। देखि बिलस नग नागरि,सखिन जहा तहा ढई। बहवतौ रस सोई कुंजै,हिय कुंजै बिलसै दुई।

अष्टदल कुमुद

अष्टदल कुमुद अष्टदल कुमुद रसै दैवत, बेगि मिलनौ जुगल जौरी। एैकेहु पंखुरि बैठिहौ नाहि,चलिहै पहुचत ओर जौरी। सखि अनुगत सैबा करिहै,सबै टहल रूचै पूरी। हौहि किरपा हौई जौरी,पग उठिहै मग दैहरी। नित सैबा नित रहिहै,नित अनुचर दासी तौहरी। कछु नाहि जानै दासी,होय जौई किरपा तौरी। लिखौ जानै कौन कहा,लिखै ह्रदय बैठि जौरी।

जगावन लीला

जगावन लीला पद गावै जगावै सखि,बजावतौ वाद्य अनोखै। पडतौ सुनहि बिनति,दरस आकुल सखि दैखै। खौलिहै नैन जगिहै,सखिया मिलि कुसुम डारै। बैठाव दुई सखिन,जुगल छबि कौ नजरिया तारै। सुवसित झारी जलकौ,सैजि बैठि मुखहु धुलारै। पहरावै कुसुम मालौ,दुई चंद बारि हियहु हारै। मुखसौ बीरी राखिहै,घैरि जुगल संग बतियारै। ऐसैहु भौर हुति दीखै,नैन च्ह्वै सौनो चाह्वै।

पिय बरसै

पिय बरसै पिय बरसै,पिय बरसै,अजहु सखी,पिय बरसै। मगहु पडी बिकल लतासी,निकरत पिय ठाडत दैखी। बैठत झौरै मुखहु उठाई,टेक देई कर पकरि बैठी। सीकर पीत पटासौ पौछै,अंक लैई कर लट पलोटी। आवत सुधि अनसुझ लिपटी,बाहँ गरै डाल न छोडी। दशा कौन रौग भयी तेरी,मंद हसै पूछे कह गौपी। टेढैहु नैन तरेरत कहिए,जै सबै तैरौ रूप सौ हौती। आबत जाबत लौग दैखिहै,मग मंदमति इकली बतियाती। आपहु आप हसत रहि,आपहु नैन भरि भरि रौती। कौन ठगौरी तैरौ नामहुमा,जौई सुनिहै सौई बाबरी होती।

ललिते हिय

ललिते हिय लगईहै सखी ललिते हिय प्यारी। नेह लाड उमगि डारै,हसिहि लगावै उर प्यारि। सखिन कहै दैखि लेऔ,लाडली ललिते कौ आहि। सुनिहै सखिजु जी करिहै,हिय चिपट्यौ ही राहि। कपोल पकरि कहि सखिजु,तबै टहल जुगल कैसौ हौरि। भौरि सी सखी बिचारिहै,साँची जुगल टहल नाहि टारि। आरि सबमैहु नैह लाड इतनौई,तू तौ चाह्वै सबन हिय वारि। ऐसैहु दरस करत निहारी,कौन लौटत आवन चाहरि।

निंदिया

निंदिया कैसेहु आय गयौ पिय बिनु निंदिया। खौवती जागती जादहु मारी,बैरिन आय गयी नैन हमारी। अरी बैरन कहा सुख तैने पायौ,पिय नाहि जाद लियै न जा री। धन मम निर्धन जाद पिय कौ,काहै मोहै दरद सौ रीती डारी। कछु कह काहै मुख नाय खौले,ऐसौ करन कु पिय तौ न कहरी। जागतौ रैन कही पिय न जगाती,तबहु तौहै मौरै नैना बैठारी। मिलिहै पिय कहिहौ मौरै मन की,सुपनेहु आय मिलै मुरारी। प्यारी कहै लाड लडौवन करिहै,काहै तजि निज प्राणन प्यारी

प्रेम पंथ

प्रेम पंथ सुनिहै प्रेम पंथ कैसो। ज्यौ अगै चलिहै,पाछै पंथ मिटिहै। पावै ठौर कुंजन,जगत सबै हटिहै। जावतौ पंथ हौहै,लौटतौ ना पाईहै। जौई राज पहुचे,लौटतौ न अईहै। नित चाव टहल,जुगल हिय आईहै। डाँटिए सखी जौ,सैबा नेकहु बिगारिहै। कबहु प्रेम मान,सौई समुझाइहै। निकारि नाहि सकै,टहल जुगल सौ। जाईहै तो जाईहै,आपु बिसराइहै। नचनी सी सैबा,करत भगि जाइहै। जौई जौई मिलै,सौई चित्तहु ध्याईहै। मिलै नाहि सैबा,अधीर हुई रौईहै। कहिए सखिन सौ,सैबा दासी पाईहै। ऐसौ हौहै किरपा,टहल जुगल करौ। दासी और किरपा सौ,जुगल लखाईहै।

आस नहीं

आस नही तौडो प्राणन प्यारी आस नाही तोडो,बिनु तुव सूनौ हिय कौ अंगना। हसि हैरौ नेक लाल कौ हैरौ,तजिहौ मान तजिहौ तीखै बैना। लाल लली दुई प्रेम रंग कुसुमा,एकहु शाख लगै पीत श्याम रंगना। कली खिलिहौ राधै मनहु श्याम कौ,भानु सुतै निरखै मुस्काना। दासी दैखिहै ना बिरह दौऊन कौ,नितहि च्ह्वै संग पिय प्यारी रहना। हैरो हैरो हसि नेक हैरौ,बिनती करै दासी गिरै दोऊ चरणा।

भलि होई

भलि हौई भलि हौई प्राण जौई निकरै न तन सौ। निकरि जावतौ पिय आवतौ,कहा करतौ अधीर हौतौ। मरी मरी नाय उठी सकै तौ,कैसौ धरती मरी धीर जीवतौ। रौबतौ कैसौ बहवतौ नैनौ,दैख सकतौ पिय नैन बहवतौ। हाय! मरी जाती कैसेहु संवारती,पिय प्यारी कौ हिरकतौ। शीतल दैह तौ अंग लगावौ,पिय हिय बड्यौ जरावतौ। भलि भलि हौई रूकेहु रहै,नेक आवनौ लौ पियकौ। पग पकरि करेहु बिनती,कछु सुखै साँवरौ च्हावतौ। सुखै सौई कौ बलि हौई उनपेई,पाछै मरनौ चाहै हौवतौ।

दूरि निकरै

दूरि निकरै दूरि निकिरै बनहु चरावतौ गैय्या। धूरि डारौ नैनहु सखा,भगै मिलनौ गुजरिया। रूप रंग पिवतौ बिसरौ,सखा संगै सँवरिया। करत मनुहार गौरि,डारौ प्रीत नजरिया। जा जा रै जा भौरे,नाहि मानै गुजरिया। जानौ ना हमै सुधि,बड्यौ तीखौ गमरिया। मचावू शौर अबहु,नाहि छैडि लंगरिया। पलोटत चिबुक बौले,तू तौ प्यारी सँवरिया। हिय होत अधीर,देखि तीखी नजरिया। करि बस जबरन,पकरि धरि गुजरिया। ऐसौ बरजौरी कबहु,दैखिहै नैनन बँवरिया।

कटीली कटि

कटिली कटि कनक कटिली कटि बरछी लगै। दई बई दुई दिशि,हिरति चलिहै कनक सिंधु। पाछै हैरतौ रसराजौ,नैन धरिहै दुई नितम्बु। कनक कलश दुई चुनदी औढै,लज लजातै आप आपु। टिकिहै हटिहै नैन नाहि,पिय प्यारी शौभा बडौ पिपासु। वेग धावति चलिहै रसिली,मिलनौ आतुर हुई जातु। जानै दुईहि संग हौहै,जान बनिहै अनजन प्रेम हैतु। बिबश हौत ललचाहै मौहन,चाहवै मग धरि पकरि लैतु। मद मदिलै रस प्रीत जौरि,चरण सैबा कबहु पातु।

छैडी प्यारी

छैडि प्यारी पुष्पमाल बनाहै सखिन छैडि प्यारी कौ। कछु कहवौ तौ कदै छैडि कहा तौहै नंदकुमर नै री। लजा अतिहि झुकाहै नयन नाहि कहवै मौन भौरि री। काहै सखि अति मानहु करिहै हमसौ काहै छिपावै री। कदै बीरी लैहै चरण पलौैटै बीजण झलिहै संगे कुंजन री। निकुंज दासी हमहु तैनेही करि राखी बनाही री। अबै काहै प्रेम चिह्न हमसौ मारि लाजि छिपावै री। सुनि बैन नैनहु उठायी राधै सखी नैनहु दीखावै री। तू जानै सबै अरी चतुरि सखी मौरै मुख सौ कहावै री। हसि हसि ठिठोली करिहि सखिया राधै मोद बढावै री। कबहु जगिहै भाग अभाग कै दरस ऐसौ पावै री।

उनीदौ नैना

उनींदौ नैना नाहि आयौ नैन निंदिया,नैना उनींदौ सौ। रैनहु जागत पिय मग जौहवत,नाहि आबत दीखौ सौ। भारहु पलकि झुकैहु नींद बोझि,नाहि पलकनि मिलि हौ। आवै प्रिये सौबति दैखि,नाहि कदै लौटै जायी पुनि लौ। सैजि लौटि लौटि बिखरू,फैरि फैरि दैखू कर सौ। दैखहु चित्र प्रीत प्रीतमहु,सिराहनौ समुझी पिय हौ। जरत अंगै अंगै बिन तौहरे,कैसौ कहवू लिपटानि अंग कौ। नाय पुकारू पुकारू प्रीतम,रहवै जावत नाहि बनै हौ। करिहौ तुव तुव ही किरपा,दासी थाकी मांदी कहवतौ।
प्रीत खिलौने लडैती लाड सखि प्रीत खिलौनै। अनेकेहु मन भयै एकहु लौनै। जोई जोई चाहवै सोई करै छौनै। एकहु रंग रंगे पगे हिय सौनै। खिझावै रिझावै करै रार सौहनै। डूबौवै प्रीत करि नित नव टौनै। सखिन मिलावै सेजि सजि दौनै। पूछै रैन हसि हसि मधु बैनै। कह सखि पिय कहा कहा छौनै। ऐसैहु पिय प्यारी सखि हौनै।
मान मनावती सखी हौ सहेली मान मनावती हारी हौ। नेक न पसीजै हिय काहै गिरधारी कौ। मान करू ऐसौ हिय पाऊ कही मिलै जौ। रूठ रूठ तौकू रै बड्यौ ही छकावू हौ। करिहै कछु या कछु किजिए जतन तुव। नेक न निहारू नाहि तजु मान प्यारै सौ। ढूंढी री भतैरी नाय मिलिहौ हिय ऐसौ। रूप श्याम दैखिकै बिसारै नाहि सुधि हौ। हाय ! री चबक जैहि रह रह उठि हिय। कहा करू आन मिलै पियही प्यारी सौ।

नैन बिसरे

नैन बिसरै नैन बिसरै श्याम कैसौ। रंगै श्याम दीखत हरे अंगै,भगिहै दौरिहि जाद आवै। पुतरी कारी नैन कारौ काजर,कारौ केश पिय संग मुस्कावै। ढिठौना चिबुक कारौ लगिहै,कारौ तमाल श्यामहु दिखावै। कौयलिया कारी दिखैहै,श्यामौ घनै घनश्याम सतावै। रैन कारी अंधैर घनीहि,जाद पिय अति लाड दिरावै। नाहि नाहि जाहवै बिसरै,पिय प्यारी अंग नैन समावै।

कौन सौ देस

कौन सौ देस लिखती पतियाँ,जो जानती पिय जाय के कौन सो देश बसै। नभ को सारे,कागज करती। स्याही नैनो से भर लाती। हसके लिखती,जो जानती। पिय जाय के कौन सो देश बसै। ये सोचती हू मै लेकिन कैसे वो छूवन तुम्हारी लिखू छूती मै भी,तो जानती पिय जाय के कौन सो देस बसै। बुनती क्यू ख्वाबौ के ताने तुमसे हि लिपटकर रहती न भरती बाहौ मे,जो जानती पिय जाय के कौन सो देस बसै। सुनते तो होगे तुम भी न चुप चुपकर मेरी ये बाते सुन लेती मै,जो जानती पिय जाय के कौन सो देस बसै।

बिरह रैन

बिरह रैन बिरह रैन काहै,बिताये न बीते। पिय संग रहतौ,मोल ना जाणी। गयौ पिय जी,अब पछतानी। रह गयौ उर रीतैे कौ रीतै। ऐ री सखियन,माधौ मिलावौ। पीर बिरह कौ,अबहि मैटावौ। भारी भये,गज सम रैन बीतै। काय जी,हमै दरस न देहौ। बिनती बारी,हमरी ना सुनहौ। प्यारी बिनु आप,रहवै न जीतै।

निर्गुण कौन

निरगुण कौन ऊधौ! निरगुण कौन सो माधौ। जिन जानै हम तिन गुण कहतौ,मिलै कागज नाही स्याही। कौन सौ निरगुण माधौ का रै,तैनै हमहु संदेसौ सुनाही। कौन कौ बात बतावै रै हमकौ,जाकौ पग जिव्हा नाही नैन। अरे! हम माधौ इन हाथ सजायै,धरायै अंजन सुनै मुख सौ बैन। हमरै माधौ सु सुगढ साँवरौ,तुव कहतौ बिनु शरीरा। वा कौ बिनु हमहौ हमहौ बिनु वाकौ,हिय जरत होत है पीरा। हमहु पडै जानि तुव भूल करिहौ,कोऊ ओर को पतियाँ बाँचै। माधौ हमरौ गुणखान रै बौरे,तौ सौ बैन प्यारी कहे साँचै।

हा हा खात

हा हा खात हा हा खात घनश्याम। देखी मानवती राधिकै,मनावन करै उपाम। कर जौरै पायन परै,पग धरै शीश ललाम। नेक निरख लयौ प्यारीजु,चित्त अौगुन नाय धरौ। कैसेहु धीरज धरौ रहू,बिनु दैखै नाय सरौ। पुनि पुनि चिबुक पलोटिहै,पुनि शीश चरण गिरायै। तज दीजौ मान नेक लाडली,प्यारी बचन याद दिलायै।

बरजोरे हरि

बरजौरै हरि बरजौरै हरि!मारै न रौवन देय। आपु आप निकट बुलावै,च्ह्यू आप ना आवन देय। दूरि देख मुस्कात रहिए,मोय भर नैन पीवै ना देय। जौरा की चलत सब जग मा,मारै नाय रोवन देय। हमहु न लाल निरबल जानौ,बलवान तैरौ बल हम होय। अबकी बैर तौरी एक न सुनिहै,प्यारी सुधि नाय खोवन देय।

कैसो बसिहौ

कैसौ बसिहौ कैसौ बसिहौ ब्रज कौ धाम। जप तप तीरथ कौन करिहै,बास पावै गौरी कौ गाम। बसन गैरूआ तिलक भाल लौ,दैऊ केश मुंडाय तमाम। अहो कहियौ जुग जौग रमावू,टूक मांगू घर घर गाम। मौन होय तरू लताहि लिपटू,टेरू रौबत भौर लौ शाम। कहौ तौ कछु जौरी हम सौ,प्यारी कौन बिधि जावै धाम।

बना सौये

बना सौये बडै दिनन भयै सौये। सुन है सखी हिय जबसौ लगौ,नंद नंदन नैना खोयै। जागत हौय सौबत रहवू,अरू सौबत रहतौ जागी। जा दिन या सौ नैन मिलायै,नैन निंदिया मोरै भागी। अरी रैन हौवतौ पलक गिराऊ,भयी भौर हौवतौ ठाऊ। पलक किवाडी ही लगिहै,मै तनिक सौय ना पाऊ। करिहै जिय नेक नाहि उठिहौ,रैन दिवस सेज ही ढुरिहै। समुझत सबै हू दिनभर सौवू,प्यारी जानै बतियाँ पी है।

दशा बुरी

दशा बुरी हमरी दशा है बुरी। ज्यौ बानर मणिक हीरा पावै,काँच जानैहि तोड धरी। मुसिका बसन ज्यौ मोल न जानै,अरी गूदडी काट करी। बिनु रसना ज्यौ कछु ही पावौ,स्वाद ना जानि परी। हिरनी कस्तूरी पाछै भागत,ज्यौ जानै न पेट धरी। तैसेई किरपा सबहि पायौ,स्वाद न जनै प्यारी।

रस भीजै

रस भीजै श्याम श्यामा भीजै नेह रंगौ,नैन भीजै रस सौ दैहि। नाहि दीखै छुवै दुई हौ,रंगरस बहवै पौर पौरि। हिय बिलसै मौद हौहै,कैसौ सरसर करै रौम कौरि। नाहि दैखौ नाहि छूहौ,दुई छूहै हौहै एक जौरि। नाहि जानौ नाहि पीबौ,छकै जैहि बढै पिपास ओरि। नाहि कहिहौ कछु कहिहौ,चुप ठाडौ जीयौ जौरि। कहा कहनौ कहा सुननौ,नाहि जानू बकू कौरि। तौसौ कृपा तौहि करिहै,नाहि दाबिहौ दूजौ देहरि।

आसरौ गिरिधारी

आसरौ गिरधारी रूठ्यौ जग सौ रूठियै,मोय नाही परवाह। आसरौ गिरधारी,आसरौ गिरधारी... चल्यौ राह प्रीत प्रीतम कौ,करियौ कोई मेरौ का... आसरौ गिरधारी,आसरौ गिरधारी... रूठ्यौ जग...... हसू रौवू इकली पीय संगै,छाडू जगत भरमा.... आसरौ गिरधारी,आसरौ गिरधारी..... रूठ्यौ जग.... बाँह पकड आवेगौ लिवानै,तब लौ जौहवू राह.... आसरौ गिरधारी,आसरौ गिरधारी.... रूठ्यौ जग.... भर पायी जग नेह झमेले,तोडियौ देह करवा.... आसरौ गिरधारी,आसरौ गिरधारी... रूठ्यो जग....

हमसौ मिल्यो

हमसौ मिल्यौ मोहना कदै हमसौ मिल्यौ। साध संतन झौरै पैठै,हमसौ कौन गिल्यौ। गोप ग्वालिन पाछै फिरहौ,हिय हमार आवौ। सबकू दरस दीयौ भर भरहि,हमसौ काहै धावौ। ऐसौ न बात बनत माधौ,हमहौ अपनौ करौ। तुमही हमरै चित्त पैठौ,हम आपनौ चित्त धरौ। बिन बात रूसै मौ सोही,हिय भेद तो कहौ। मग जौहवती भई बाँवरी,प्यारी बाँह गह लहौ।

सिखावेहै टहल

सिखावैहै टहल सिखावैहै सखी टहल जौरि कौ दासी। धीर धरिहै रसै रंग दैखि,बहिहै नाहि सोई दासी। दैखत बहवतौ नैन थमियै,लाइहिहै नैक ना उदासी। हासि हसिए करिहै ठिठौली,रंगे डूबिहै रहिहै प्यासी। बारिहै सरबस इन्है का इनपेई,सखी कहवै रहिहै दासी। मिलईहै नित नित विधि सौहि,रैन नैन रखिहै जगासी। प्रियाप्राण जानि लाड लडइहै,कर दीजिहै कर थमासी। धन धन सखिजु सिखहिहै करनो,टहल सिखावै करिहै दासी

जगिहै भाग

जगिहै भाग जगिहै भाग अाजु सखिहै मौर। भौरही टहल करतौ भूली,भाल रौली लगाइहै । लगईहै दोरि दोरि बीरी,रखिहै नागरि मुखै। दैखिहै सूनौ माथ सखीही,श्यामा कैसौ नैह करिहै। अधर पीक लैत पौरि,गौल बैंदि भाल रचिहै। सबै बिसराहै सखी,कदै बैंदि नाही भूलिहै। कहै दासी चरणन सौ बिनती,ऐसौ भाग कदहै करिहै।

धन बनिहैं

धन बनिहै युगलवर! रहिहै धन बनिहै। धरिहै तालै ज्यौ धना,सातौ तालैहु रहिए। तबहु अतिहि डरिहै,नैन चित्त ताहि धरिए। निरखिहै पुनि पुनि खौलि,सहैजतौ पुनि धरिए। रहिहै कहु किसी गामहु,चित्त तालैहु ही गहिए। करिहै ऐसेहु दासीकौ,श्यामश्यामा संगै रखिए।

निगौरि लाज

निगौरि लाज निगौरी लाज, गिरिहै गाज तौपै। दैखिहै रैन दिना मगहौ,पी सौ आवतौ काय घिरि अइयौ। अनमिल दुई नैनहु रहिहै,पलकहु काय ढाप लइयौ। छूवतौ भगिहै कौन दूरिहै,पाछै फिरि नैन बहत रहियौ। दूरि दूरि भगिहै बैरनिया,हट्!दैहि मौहि निकरि जईयौ। कियौ धरौ तैरौ भुगतिहै नैनहु,बैरि दूरि देस बसियौ। बिनती ऐहि अजहु सुनिहौ,दासी नैनकू दरस दैयौ।

नैन बिसरै

नैन बिसरै नैन बिसरै श्याम कैसौ। रंगै श्याम दीखत हरे अंगै,भगिहै दौरिहि जाद आवै। पुतरी कारी नैन कारौ काजर,कारौ केश पिय संग मुस्कावै। ढिठौना चिबुक कारौ लगिहै,कारौ तमाल श्यामहु दिखावै। कौयलिया कारी दिखैहै,श्यामौ घनै घनश्याम सतावै। रैन कारी अंधैर घनीहि,जाद पिय अति लाड दिरावै। नाहि नाहि जाहवै बिसरै,पिय प्यारी अंग नैन समावै।

करिहु टौना

करिहु टोना रसिक रसलाल पै करिहु टौना मै। करिहौ कछु बंशी लई लैहु,नचावू बंशी कौ ताल पै। सखी री पखा मौर लई लैहु,लगाय दैहु घूंघटा ही मुख पै। देऊ बूटी कौउतौ या कू,डौलतौ पाछै पाछै भाजै। या कछु ऐसौ टौक मारू,बैठाय लैहू कर सो कर पकरै। जावै माखन चुरावै कू,संगै मौय लइकै ही जावै। देखिहै पनघट जावती कौ,भ्रमर सौ डौलतौ धावै। कछु करिहु जतन ऐसौ,बैरि बैरि आयकै न जावै। सखिन कौ सुनिकै हिय मैरौ,ऐसौ बूटी ढूंढनौ च्हावै।

बलिहार नैना

बलिहार नैना बलिहार सौई नैना,जिन देखिहै जौरी। अरस परस सखी जमुना तीरै,रंग रस भीजै रैना बीते। बिसारै सुधि बुधि गैह नेहा,कबहु आवै भौर भान न हुते। भौर लौ पुलीनहु बिलसे,भयौ दिवस मातु सुधि भीते। चतुरहु राधै मातु समुझावू,तुव कहा कहिहो कहा रैन बीते। कहिहो लाल सोई पूछिहै,जिन रैन मौरा मग रोके। अहा! लली अति चतुर होहि,सबहु गुणै मौर लीजे। प्रेम दरस जिन नैन पाए,दासी जा के चरण धोई पीते।

रँग महल सेजा

रंग महल सैजा दैखिहौ रंगिली रंग महल सैजा। चित्र बिचित्र बिलास लगै,झीना बसन पीत भीता। सुवर्ण पटिका थाल भूषण,बीरी पीक पत्र रीता। श्वेत धवल चदरि लटकन,सिरहनौ कोमल अति हुता। पात्र जलै घट कौनेहु,सुगंधि पुष्प थालै भरिता। झरौखेहु पट अधखुलिहै,दीख्यै जमुना पुलीन बहिता। हसि हस लावहि नवधू,पाछै आवौ नव वर नंदपूता।

सुकुमार जोरि

सुकुमार जौरि अहौ!अतिहि सुकुमार जौरि। निरखतौ मनहु डरपै,कैसौ कैसौ साज धरै। कपोल कोमल भारहु,कैसौ चंदन चित्र बनै। कैसेहु कर सुकोमल,कंकनहु भारै झुकै। हाय! कर्ण पुष्प,धरै कैसो धरायौ नीकौ सोई लगै। नुपुरै कैसौ भारहु पायल,पद कमल दुई धरै। गढिहै अंग अंग कैसेहु,रज कण पादौ लगै। पलक नेक भारी हौती,तेौ सौ बुहारती पगै। कहा करिहौ भूषण धरायै,मलूक लागे झीनौ सजै।

कंदमन शाख

कंदमन शाख ठाडी कंदमन शाख पकरि राधै। शाख झुका छिपि निरखै साँवरौ,पुनिहि पाछै शाख छिपिहै। हौवत बिकल राधिकै टेरतौ,हसि निरखी नाहि श्वास कढिहै। थकित चकित हौहै बैठिहौ,आय नागरि नैन मुंदिहै। लिपटि बहतौ भुज कसिहि,रस नेह बदरा सबहि ढुरिहै। पदचाप दाबिहै ठाडीहौ सखिन,रसप्रेम लीला नैन निरखिहै। दिजिहौ दासिन कबहु दरस जु,बारि बारि बिनती दासी करिहै

गौरश्याम पाछै

गौर श्याम पाछै मना भगिहै गौर श्याम पाछै। हेरिहौ लटक लटकन,अटकै नैन दुई साँचै। गलबाही डारै ढुरितै,चंद्र चकोर नैना आछै। मिलन बिरहित,बिरह मिलित रहिहै हिया राखै। लडैति लाड बहु विध,प्रीत डारिहै जुगल साँचे। कहिहौ नौन राई बरौबर,कहै सटीक कौन बाँचै।

श्यामा रौवै

श्यामा रौवे बिदा करिहै आपु प्राण,बैठिहि श्यामा रौवै। आपहु कहि जावौ जु,जबै कहतौ नाहि दैखै। जानतौ पिय पीर प्यारी,जावू कहतौ नाहि बनै। करिहि विदा अधरि हसि,नैन जलौ भीतर भरै। आवनौ पिय बैगिहि,मुख सौ कहत जै ही बनै। दूरि लौ मुडी मुडीहि दैखी,जात पियहि भूमि गिरै। थामतौ जल बहहि आयौ,एक अश्रु सौ सौ बहै। प्रियसुखहि सुखि हौहिहै,ऐसी प्रियाहि श्यामा हौहै।

सजिली शौभा

सजिली शौभा सजिली भौरी हौहि कैसी शौभा। पट्टिका बैठी पादौ पाद धरौ,अंगुरि कर सौ कर फसाई। घुटुनि कछु ऊँचौ रखिहै,ताई रखिहै पकर कराई। सौहवतौ झुकी नीकौ ग्रीवा,नकबेसर हिरि झुकी जाई। तीखौ टेढौ नयन उत ही,जित मौहन ठाडौ हुई जाई। कोटि चंद्र शोभा रोम निकिरै,जै हि थौडौ कही नही जाई। चित्र सौई जड सौ हौहै,रसलाल बचिहि कहा पाई। दैखि जड प्रीत शोभा,लजा नागरि नैन झुकाई। दैहौ दैहौ दरस जुगल हौ,नाहि कछु धीर हिय धराई।

कालिन्दी जु कौ सेवा

कालिंदि जु कौ सेवा लगाय कान सुनिहै कालिंदि जु कौ सैवा। हिय दुई रंग रस मोद जबै हौवतै,ह्लादिनि तरंग मोद बढावती। बडै जमुनाजु जबै दुई कर पकरत,अंग कौ कैसर चंदनौ बहावती। कछु दूरि जाय धारा जैसौ एक मिलिहै,तैसौहि मिलन कौ मौद बढावती। प्रेम रस रचे पचे अंग सुअंगै,दैखिहि तरंग जल तरंग मिलि धावती। झीनै झौरे बसन अंग ज्यौ चिपटिहै,त्यौहि हिय दुई एक हौवनौ च्ह्वाती। ऐसौ सैबा करिहु कौ हियहु मचलै,ऐसौ ही टहल दासी सखी सौ मांगती।

पिय निको

पिय नीकौ आवतौ सखी पिय नीकौ मेरे। दैखिहि दूरि लौ आवतौ,पुंज किरण अंग निकरि। बढत ओर ओर इहा,निकटै अतिहि मुखै आयरि। दूसर छनै पुंज कांति,हिय समाय एकौ हौयरि। तप्त दिप्त कंचनै,लालिमा मुखै ऐसौ बिखरि। एकमैक हौहि दुई हम,पिय रहिहै आपु बिसरि। सुपनौ साँची आपु जानौ,दासी आपहु कै चरण बिहरि।

हिय भरि

हिय भरि हिय भरि नैना कर लीजै बंद। कुमुदनि श्यामा भौरी,भ्रमर लालजु नंद। सुवर्णी पीत गात राधिके,मेघ श्यामल चंद। खिलति हसिहि माधव,हसि किशोरी मंद। टेरिहे बंशी मोहन,बजावै पायल छंद। बसिहै ऐसौ जुगल जौरि,काटत जग कौ फंद।

हसि हैरे

हसि हैरे माई साँवरौ हसि हैरै। ठाडौ मग माही,चितवनि बैन मारै। कर घुमाय बंशी,सैन बैन टौना डारै। पकरै वेणी खैचि,पाछै तमाल गैरे। छूबत कहा कहिहौ,पकर बाँह छैरे। खैचि चुनरी ओर डारि,दुई पीतांबरै घैरै। भींच कराई चूडि मौलि,अंगुरि छाप डैरै। नाहि जावू दधिहु बेचन,सतावौ साँवरौ ठगौरै।

स्नान लीला

स्नान लीला माखन लौना लेत भगी पाछै,मौहना दौरि दौरि जावै। नह्वतौ जलै ताता करि राखि,नाहवनौ बचनौ चाह्वै। लालच दैहि लौना माखन,नाहि बात सुनत भगि जाहै। कहत जशौदा लालहु सुनिहै,नह्वातौ जय जय कराहै। भौरो मुखै कछु सौचि कहिहै,माई जय जय जु काय करावै। लाल सुनिहै जय जय करै,मैरौ लाल बल बड्यौ पाहवै। कहिहै भौरि मातु जा लाला,जौई मौहन जय जय सिखावै।

दीपोत्सव

दीपौत्सव कुंजन हौहिहै आजु दीपौत्सव। भाँति भाँति रंग नवरंग,दीप नवकृतिकै। पग डंडी तीरै तीरै,सजिहै तमाल नीचै। झरौखेहै दीपमाल सजिहै,सजिहै द्वार निकुंजै। गौलिहि फुवारै चबूतरौ,दीपौ दीप धरिहै। खिलिहै कुमुद मध्ये,दीप मछरी जैसौ जरितै। भई दीवाली जैसौ अजहु,कुंज दुल्हिन बनियै। बनि जाहू कौऊ दीप हौऊ,जुगल मौद नैन चखिहै।

पगा मन

पगा मन दीन हौहि काहै नाहि रहतौ रै पगा मन। काहै उडि उडि फिरिहै जगत कौ,काहै न ध्यावै जै जै चरणा जोरि। काहै मतिहीन होत बौराय जग डोलतौ,काहै पिय प्यारी नाहि हिय बैठारि। पाषाण सम हिय काहै कियै तैने राखैहै,काहै न जुगल करूणा देखि नैन बहरि। यासौै झूठौ नेह करि जग सौ लगायौ काहै,काहै कौ तैने पिय प्यारी कौ भकायोरि। जबहु तौ रोवैगौ जगत दुत्कारैगौ,अबहु नाहि जुगल प्रीत मौल जानैरि। छाडि झूठै साँचे नेहा ओरन सौ,टहल टकोरि हित नैनहु बहायोरि। कर जोरि कर बिनती प्रेम जौरि सौ,कुंजन टहल कौउ दासीहु कौ पायौरि।

टेरिहै राधा

टैरिहै राधा मुरलिया! टैरिहै नाम राधा। टेरिहै कंकंणी किंण किंण,भौहहौ टेरिहै नाम राधा। लटकि लटकनि हौ टेरिहै,टेरिहै नुपुर छन् राधा। चम चम भूषण टेरिहौ,अरू टैरिहौ झूमर राधा। रोमकूप बसिहै प्यारी,कहै रोम रोम पिय राधा। दीजिहौ कृपा नाम धन रंगीली,टैरूहु रोम रोम सौ राधा।

युगल एक भये

युगल एक भए प्रकट भई आजु जुगल जोरी। रूप रंग ऐकैहु ऐक,ऐकेहु देह हौ री। कबहु झलक लाल लाडलौ,कबहु लाडली लली कौ मारै। कबहु बंशी सजावत कर सौ,कबहु कमल साजत न्यारै। मुस्कन अधर ऐकहु हौवत,ऐकहु दैह ऐक प्राण होहि। चरण शीश नवावत प्यारी,झुकावत हिय जोरी कौ ही।

कृपा वर्णन

कृपा वर्णन आवै कहवे मे कैसौ किरपा। पडत रही बिषय तम ही,आप बनि आयो उजियार। जबहि आप बिसार दयी,आपही किन्ही पुकार। बेरि बेरि जग भरमत होयी,तुमही किरपा करी अपार। आय बचायी झूठौ धंध सौ,कहे सखी होयी ओ री हमार। करिहौ ऐसौ कछु जी गिरधर,प्यारी होयी जाये प्यारी तुम्हार।

श्वास बिक्री

श्वास बिक्री बैर पडी श्वास बेच दू हाट। जानत हमहु बिलग नाय तौ सौ,तबहु बिरह खाई ना जावौ पाट। श्वास श्वास जादहु अयी जावै,कबहु श्वास न आवै हौवे बात। ता दिन सो सब बैर पड्यै है,तौ सो नैना मिलाय भई रात। आवन सो भोरहु हुयी जावै,पुकारै प्राण प्राण प्राणनाथ। या कहि जावौ प्राण बेचि दू,कोऊ मिले लई  जावे साथ। जानत हू सब जुक्ति तिहारी,देय जग भग जावौ आप। मधुसूदना नाय छल मोय करियौ,नाय दीज्यौ प्रेम प्यारी नाप।

रस भरी जोरी

रस भरी जोरी रस भरी रंग रंगीली जोरी। रस राज सबहु रस भरीही,रस बह्यौ हरि ओरि। रस को सखी सब लता रसहु को,रस सबे पात्र होरि। रस बातन रस पातन होयो,रस लता पता गोरि। रस छैल छबिलो छैल बिहारी,रस रेशम राधा डोरी। रसहु बोली कोकिल मोरा,शुक पपीहा को ओ री। रस ही भरी प्रेम परीक्षा,लेवे प्यारी को जोरी।

युगल रस

युगल रस केलि किलोल करत दुई प्यारौ। लाजहु पटा गिरिहौ सबहि,आजु रसिलौ न्यारौ। रस देवन होर लगिही,सरबस दीन्है वारौ। लता सौ लिपटी बिहारिन प्यारी,लपटायौ तमाल सौ प्यारौ। मोतिन पुष्पन हार टूटिहै,केली काम टूटिहौ सारौ। भरत अंक दुई एक भए हौ,प्यारी झाकत कुंजन द्वारौ।

निंदिया

निंदिया बेच आई निंदिया सखी बजार। बहुत दिनन या ने मोय सतायो,या को कर दई बंटा धार। जबहि सखी प्रीतम मग जोहती,आय बैठती नैनन द्वार। आजु आनंद या कू बड्यौ छकायौ,दई दीन्ही ऐकौ खरीदार। अब हे सखी रैन रैन जागूगी,रहू रैन पिय मुखडा निहार। कर बिनती प्यारी कहे,कोऊ लै लौ भी निंदिया हमार।

करुणा

करूणा करूणा निरखी अपार। बहुत जनम गवायौ ऐसौई,अजहु भयौ बलिहार। अज लौ रौबतौ पिय नाय आवै,अज रौयो करूणा निहार। जे जनम गमायौ देत उलाहनौ,दैख्यौ करूणा कौ नाही तुम्हार। करूणामयी तैरौ करूणा अपारा,भारी अधमाई करूणा तुम्हार। पहिले पहल प्रीत भरोसा गमाई,जानी मौल प्रीत कौ आज। बड्यै दिनन भये देखीहौ न किरपा,प्यारी करै किरपा गरीब निवाज।

निराशा

निराशा हू न कबीरा नाय मीरा,दाँसी साँवल कौ री। भटकू भूलू बिसरू जग मा,करनौ ब्रज ही बास री। हसू रोवू नैना खौवू चाहै,रहनौ चरणा पास री। गुण अवगुण सब अर्पण किन्है,दीजौ या करियौ नास री। दासी कर ही रखियौ मोय,प्यारी जनम जनम को प्यास री।

चेतावनी

चेतावनी मूरख मनवा जनम गमायो विरथा। बिन काज बातन मन धरियौ,बन्यौ फिरत सुरथा। काहू को काज कबहु न आयो,जनम विरथा गमाय जाय। आप आप को भरत टोकरी,सब आपन च्हाये समाय। जा दिना पंछी उडि जावै,रौवे बैठ मुंडेरी कागा। अबहु दाना चुगन लागिहै,गमायी रैन न सौवत जागा। जा दिन कहा मुख छिपाय घौमियौ,मांगै किये धरै कौ मौल। कहै प्यारी दासी अबहु समय,मूरख मनवा मनहु तौल

दासी भाव

दासी भाव जुगल जौरी सैब्य हमारौ,हम वाकौ सेवक दासी। सैबा होय प्राण प्राण हौये,बिनु सैबा रहत उदासी। धीर धरै काय बाबरै मनवा,रहै टेरत नित चकवासी। बिछौह हौय चैन पलहु न पावै,पिय लैवत नाम सुधासी। अजहु न टेरिहै नाम पिय प्यारी,हीरा जनम गवायौ विरथासी।

राधा नाम आधार

राधा नाम अधार हमारौ राधा नाम अधार। गावत डौलत ब्रज गलियन मा,रौबत नैन बहार। हमारौ राधा नाम अधार। पिय प्यारी नित मुख सौ बौलत,बिनु पिय नाय रहार। हमारौ राधा नाम अधार। हसत न पलहु रौबत रहतौ,जब लौ मिलिहौ न प्यारी हमार। हमारौ राधा नाम अधार। आय मिलौ प्यारी निरख लिजिहौ,टेरे प्यारी कद सौ नाम तुम्हार। हमारौ राधा नाम अधार।

सब जाणौ

सब जाणौ थां सु सब जाणौ जी म्हारा पिव। म्हारी थारी आछी साँची,सबही जाणन हार। हिय कौ जिय कौ,पिय कौ सबहु रह्यौ सम्हार। हांसणौ रौणौ नैना खौनौ,हौणौ आपहु पालनहार। चौख्यौ औख्यौ जैसौ तैसौ,प्यारी थारी सृजनहार।

मान लीला

मान लीला आजु लली मान ठान लीन्ही। नीको सौ बात भई सखी री,लाल मुख बीरी नाय लीन्ही। श्यामसुन्दर सौ मुखा चूमतौ,हम नाय अधर दीन्ही। घाट घाट कौ पानी चाख्यो,पुनि हमहु जाद किन्ही। झूठौ बीरी राखू न मुख सौ,कौऊ और सखी दीन्ही। हा हा करत बैठ गयौ पायन,लली नैन न कौर किन्ही। आजहु लाडली छमाहु करिहौ,दान नेह मोय दीन्ही। प्यारी ठाडी मंद मुस्कावै,सखी सब चुटकी लिन्ही।

हू तिहारौ

हू तिहारौ हरि हू जैसौ कैसौ तिहारौ। मैली कुचैली भाग अभागन,मति कुमति होय तिहारौ। तारिहौ भव सिंधुही मोय,बाह पकर ही उबारौ। नैनन अश्रु प्रसादी दीजियौ,सब कछु ही देवन वारौ। आय मिलिहौ बेगि युगल जोरी,कर नीकौ उर ही लगावौ। करे प्यारी कर जोर ही बिनती,मोय बिसार न जावौ।

श्रीजु छबि

श्रीजु छबि राधिका! देख्यी छबीली छबी। डारयौ पग कालिंदि जल भीतर,कर पकरयौ लहंगा अरी। सुंदर सुकोमल पगहु सजै दुई,जावक पायल सौ री। अध बाहर अध जल भीतर,खेलत जल सो ही। प्रेम प्रतीक्षा पीय कौ करत,आवत दीखे नाही। मनमोहनी छबी ऐसौ प्यारी पे,प्यारी बार बार ज्यै बली।

ब्रज प्रणाम

ब्रज प्रणाम अहा! ब्रज प्रणमऊ बारम्बार। जा मे वास करन संहारक ललचै,ललचै रचनाकार। जा रज शीश चढावन च्हावै,शुक सनकादिक व्यास। रोबत ब्रह्मा लछमी मांगे,ऐई ब्रज धाम को वास। नारद नित वीणा मे सुमिरै,जाकी महिमा आठो याम। ऐसेहु ब्रज प्यारी वास दीजिहौ,पावै शीश ब्रज कौ धाम।

माखन चोरी

माखन चोरी माखन चुरात मणिखम्ब आप देख्यौ। छोट्यौ अति भौरो लाला,सकुचायो अति डरप्यौ दूजौ देख्यौ। तुतले बैन मुख ही सौ कहवै,सुन लाला चोरी कोउ सो न कहवौ। जो च्है नीकौ सौ लौना लई लै,कहत खम्ब कौ लौना दीज्यौ। छोट्यौ सौ कर माखन सौ भरौ,लई खम्ब प्रतिबिम्ब मुख दैहौ। मात जसोदा लाल लीला दैख्यै,प्यारी लीला बलिहि जैहौ।

बिनती

बिनती श्यामा जु मोहै रख लीजो बरसाना। करि चाकर मोहै राखो प्यारी,छोड तेरौ दर कितहु न जाना। जान आपनौ शरण लगावौ,प्राणन सो प्यारौ होय बरसाना। अधम कुमति जान नाय बिसरावो,कर चेरी मोय आपनौ बनाना। महल टहल नित सेवा राख्यौ,राखिहौ निज चरणन बरसाना। प्यारी जोरी दासी है रहिहै,छाडि तेरौ दर कितहु न जाना।

बाँवरे नैन

बाँवरै नैन नैना भए बौरे। बिनु पिय लगत पलक नाय पलहु,रैन दिनन जगिहै। झरत झरत सूख्यौ नैन हमारौ,नैना अँसुवन नाय अईहै। राह तकत खुलै रहिहै नैन दुई,पलहु नाय गिरिहै। राह तकत थके नाय कबहु,मग जोहवत ही रहिहै। दरस परस बिन व्याकुल प्यारी,नैनन आय जइहै।

सेवा अभिलाष

सेवा अभिलाष मौहै राखिहौ निज सेवाहु प्यारै। बनाय मोय राखो बंशी अधर कौ,राधा राधा सुनावू तौहै। या च्ह्यौ लटकन मुकुट बनावौ,उरझू अलक लली कौ है। नैनन कजरा रेख बनाय लऔ,राधा ही निहौरा करिहौ। पीत पितांबर या पटा बनाय लौ,उडि उडि चुनर उरझ्यौ। पग पायल कौ नुपुर करिहौ,राधा दई ताल नचिहौ। कछु न कछु प्यारी करही लीजौ,बिनती चरण करिहौ।

स्वप्न की बात

स्वपन की बात सखी री कहू सुपने कौ बात। देखि सुंदर सुघड साँवरौ लये बंशी ऐकौ हाथ। झोरे अरू झोरे जावती देखी अधर दुई ललचात। दोरि कछु सम्मुख पिय आयी,छूये मृदुल कर गात। टटोल लयी देह सपूरण,नाय खावै खिलाडी मात। जाने नाय दूजी नार सतानौ,समुझै दाल अरू भात। ऐसेहु रसिक जार प्रिय पै,वारू तन मन कौ बात।

बलिहारी नैना

बलिहारी नैना उन नैनन को बलिहारी हौ,जिन नैननहु मा श्याम बसै। सब जग निधि वारि डार दयो,इन नैनन सौ मोरे नैन फसे। हाय सम्हारयौ कैसौ जाय हिय,मौय निरखे जोई श्याम हसै। रंग लाल लली इन नैन चढ्यौ,कोऊ ओर न रंग मोय लसै। करि जोरि कर बिनती प्यारी,आय नैननहु नंदलाल बसै।

दुख

दुख विधना! काय बनाई पलका। नेक न देखन देय मोहै,ढुरिहि जावे पलका। त्रुटि पल छिन बाधा करिहै,अडि अडि जावै पलका। जबहि पिय निहोरा करिहु,पटहु गिरावै पलका। कहा मति मारी जो इन्ही बनाई,मोहै न भावै पलका। बिनु पिय प्राण प्यारी अटक्यौ,बहत ही जावै पलका।

विश्वास

विश्वास कौन साधे मारग पंछी कौ। कौन सडक जल मीन बनावै,पथ पंछी कौन बनावै जी। तैसेई प्रीती मारग आयै,कौनहु राह सुझावै जी। जोई गिरतै कौ उठाहिए,जोई बिगरै काज बनावै जी। सौई साहिब हमकू राह बतावै,सौई मारग अंध दिखावै जी। सतगुरू किरपा भली होहिए,जोरी झोरै जान सिखावै जी। बलि बलि जावू युगल चरणा हौ,प्यारी बलिहि जावै जी।

लज्जा

लज्जा मौ सम अधम कुमति दीखै कोउ न। कुटिल अधम गुणहीन मति मारौ हूँ,हूँ ही खल कामी रस लोलुप बाँवरौ। सप्त सिंधु नवद्विप जग ढूंढै हू,देखिहौ न कोऊ लोभी दुष्ट मौ सौ साँवरौ। फिरत ह्रदय धरै काम लोभ क्रोध ही,मोह तजी नाय जोरी झौरै काय जावरौ। हा हा खावू कौन मुख सो पुकारू हौ,कारौ मुख वारौ नाय दिखावन काम रौ। कौन विधि प्यारौ मलिनता मैटिहै,प्यारी कौउ विधि चरणा सौ लगाय रौ।

लाज बिसराउं

लाज बिसरावू कुल को लाज बिसराय मिलू पिय। उघारि दउ पट घूंघट लाज कौ,सरम तजी अज जानी। डोलती फिरू इकली ब्रज माही,कोउ नाही संग लै जानी। पिय मैरो मै पिव कौ ह्यै जावू,कोउ को इक नाही मानी। जग समुझावै मै जग समुझावू,थारैै कोउ काज नाही आनी। हू तौ दासी जुगल जोरि कौ,प्यारी चरणा हेत लगानी।

छवि बसै

छबि बसै छबी बसै हिय मैरौ गौर श्याम। राजत पीत पीतांबर धारै नील बसन अंग बाम। काजर रेख दुई नैन सुनैना बने दुई अति सुखधाम। अधर सरस मुस्कन बड्यी प्यारी बीरी पीक रचै ललाम। रैन दिनन प्यारी बुलावै टेरे जुगल प्यारौ नाम।

नैनन बलिहार

नैनन बलिहार बलिहारी हौ,नैनन पे नंदलाल। नैन जोई कटारे गढत हियारे रंग रंगीलौ लाल। दृगन मछरी सो नैन सैन मारे उरझे लट घुंघराल। नैन छबि बसिहौ गौरी श्यामा कौ छिपाये रखत हौ लाल। प्रीत भरे दुई कजरारे नैना करत हिय कू बेहाल। प्यारी देखि कबहु नैनन जोरी कबहु भयो हु निहाल।

युगल कृपा

युगल कृपा अधम करे प्यारौ कृपा भतेरी। नैन को अंध मतिहिन बाँवरो,नाय काय नाम कौ टेरी। ता पेई कृपा बहुत तुम किन्ही,नेक ना किन्ही देरी। कुटिलता भरौ हिय बिषय कुमति हौ,छबि प्यारो प्राण न हेरी। ता पै करत चेरी मोय अपनो,दया कृपामय तेरी। बहत न नैन जरत न हिय नेक,नाय हुयो राख को ढेरी। अधम कुटिल ता पै निर्मल किन्ही,मोय करूणा सो हैरी। ऐसी करो किरपा अधमताई छूटै,बने चेरी चरणा सो प्यारी।

सद्गुरु कृपा

सद्गुरू कृपा सद्गुरू कृपा अनंत। चेला ही साध पुजाहिहै,गुरू संग ही सधवाय। कृपा करे चतुर बारि हौ,आय जानिहै कृपा जनाय। पहिलै कृपा होय जाद सौ,ज्यौ कछुवी अंड पकाय। धरै राखे रेती भीतर हौ,आप जल भतर स्मराय। जावै कितनोई दूरी अंड,जाद हु सौ पक जाय। दूजै दृृष्टि कृपा भयी,ज्यौ मछरी सहेजे अंडाय। नेक नेक देरि सो देखती,त्यौ चेला गुरू दृष्टि पक जाय। तीजै कुररी सम कृपा,शब्द दिक्षा कहाय। अंड भूमि ही पडिहै,आप नभ उडि शबद कराय। शबद सौ ही अंड पकिहै,त्यौ चेरा पकि जाय। चतुर्थ होय स्पर्श दिक्षा,मयूरी सम ह्यै जाय। बैठि अंड पकाहिहै,त्यौ शबद सौ चेरा पकि जाय। करिहै कृपा सद्गुरू मो पै,प्यारी बैठी शीश झुकाय।

कृपा

कृपा कृपामय निरखी कृपा तुम्हार। दासी कर कितनोई कौ राखै,अबहु हमरी बार। चले कुमारग बहु समय,अब करिहौ आय सुधार। बिनु कृपा बिनती नाय होवै,नाय आवै बिनती बिचार। कृपा ही कृपा निरखू हर ओर,माँगू कृपा मै गोद पसार। बडै बने मुनि ध्यानी कृपा सौ,मोय लीजौ दासी बनार। चरणन प्यारी चित्त लगै,ऐसौ किरपा करियौ हमार।

युगल रस

युगल रस रस घन दामिनी दुई बिलसै। नील बसन पहिरै घन सुंदर,दामिनी उठि चमकै। मोति लुटावत भर भर घनहि,रहि दामिनी जाय झनके। कबहु चिबुक कबहु कपोल पलौटै,युगल दोउ बिलसै। अधर कलिका सम पुष्प अधर धर,रस प्रेम भरै हुलसै। झाकत चन्द्र तरू सौ तम ही,जुगल जोरी निरखै। छकत थकत कछु सजग होहिहै,पीबत नाही अघिहै। जिन नैनन इन्ही दरस पाहिहै,प्यारी चरणन ताहि गहिहै।

गुरु कृपा

गुरू कृपा गुरू करि कृपा अपार। अंध लकुटि ज्यौ सहाय,त्यौ गुरू चेरा जान। तम मिटाय करै उजियारा,मिटाय देवै मिथ्या मान। मारग प्रेम लली लाल दिखावै,चलिहै कर पकराय। रखिहै सेवा युगल चरण कौ,तिन दासी ही कराय। गुरू कहा बचन लकीर सिल को,नाय कबहु मिथ्या मान। प्यारी इन्ही गुरू चरणा गहिहै,सरबस इन्ही जान।

ब्रत तीर्थ

ब्रत तीरथ ब्रत तीरथ कर कितनेई,पिय मिले न आय। रे मूरख मन फिरत न काहू,हिय दरस लए पाय। देश बिदेस भतेरो घोमत,नाहि पलहु दए दिखाए। पलक सो पलक जबहि जोडिए,पिय छबी दिखलाए। एक दिनन पिय आन मिलेगौ,आस मोहै बिस्वास। दासी साँवल प्यारी होयी,श्वास श्वास पिय पास।

कालिन्दी जु सेवा

कालिंदी जु सेबा कलिंदि अंक बिलसै राधा मोहन। दुई रस पगै,करे अंक बिलासा। निरखि निरखि,नैन पीवे रूप सुधा सा। कमल पुष्प दुई,कर नीकौ जानौ। खोये नैनन बिम्ब,भये एक मानो। सखीन संधि किये,युगल करी होई। हिय बिलसत कुंज,अनूप माहि दोई। रूप सुधा पीवै,नैन न अघावै। बलि बलि ऐसौ,प्यारी रूप जावै।

युगल एकत्व

युगल एकत्व एक भई दुई रस भरी जोरी। नवल लाडलो लाल श्याम जु,नवल श्यामा किशोरी। अंग सुअंग मिलित ज्यो रस रंग,ज्यो रसभरी हौ पौरी। अधर सरस धरै अधर दुई हौ,ऐकेहु मिलित है हो री। नील पीत ज्योति एक होय रही,रस भरिहै पोरी पौरी। ललित लडैति लाल लाडली,प्यारी सेवत चरणा कौ री।

बहत नैन

बहत नैन बहत नैन बिनु गिरधर। डार सो बिलग पुष्प सम होहि,बिनु पिय प्राण अधारे। देखत समय ठौर नाय देखत,बहत नैन पतनारे। दिवस रैन कछु नाय सूझत,सूझै मिलू कैसो प्राणन प्यारै। आप बिनु नाय भावै कछु हौ,कौउ नाय संग हमारे। आय मिलो घनश्याम साँवरौ,प्यारी प्राण उडि जावै न बिचारै।

लली अहीर की

लली अहीर की मै लली अहीर की,कहा जानू प्रीत प्रेम। भावे जसोदा पूत,नैनन निरख च्है। कहा री सखी कहवै,इस ही को प्रेम। देख हिय धक्क,रहि जाय प्राण प्यारै को। या कौ ही कहत,रह्यौ है का जग प्रेम। जा जिना दरस छबि,साँवली पावू नाय। काटे कट्यै ना दिना,कहा होय जे प्रेम। जा पे लुट्वै को,करत हिय सरबस। ताई को कहत का री,सबहु प्रेम। मै भोरी गुजरी,प्यारी मोय नाय पतो है। नाय पतो मोय तो,प्रेम को कोय नेम।

प्रेम कीबात

प्रेम की बात बात सखी प्रेम की थोरी ना बहुत। प्रेम प्रेम जपिहै प्रेम नाय जानिहै,ऐसेहु जगत मा फिरिहै सबहि। जावे सबै आवे प्रेम बचिहै न कछु,बिनु पीय कछु भावे न तबहि। दीखे चहु ओर पीय प्राण ही प्यारौ,जानिहै गयो संग आयो पिय तबहि। कौन वा की सुधि लेय राखिहै कौन वा कौ,दिखिहै प्रेम को फूल दिशि सबहि। प्यारी कही सुनी बाता कहवै बिनु बात,जानिहै न कछु बात प्रेम को जबहि।

प्रीत व्यसन

प्रीत व्यसन प्रीत व्यसन अद्भुद अरी होहि। व्यसन सुनि कहा अरथ कहि तो,नशा होहि मद जे होहि। स्व बिसराय दिन्ही स्व कौ,व्यसन होय जोई स्व खोई। मैरो तिहारौ बचिहै कछु ना,रहि जावै बचौ सब कछु तोहि। आप बिसराय प्रीती ही हुई जाय,रहि जावै व्यसन भूलिहै सबहि। जोई हिय बसिहै सोई बाहर दिखिहै,याद अापनो रहवे न कोई। पहिलै कहा कहा बादहु होनौ,नाय पतौ रहिहै व्यसन सो होहि। बिगारै सबहि ओरहु व्यसन तो,प्रीत व्यसन जगत भारी होहि। कहा परे कौन बिधि परे हौ,कौई कछु कहवे कहवे जोई जोई। लगिहै व्यसन प्रेम प्रीत कौ कबहु,कबहु प्यारी व्यसनी ऐसो होहि।

बिनती

बिनती साँवरौ निर्मोही ना बनियौ। हू करा औगुन तजियौ नाय,औगुन चित्त ना धरियौ। मारीयो रौदियौ चरनन मौय,चित्त सो ना जईयौ। जित्त राखो तित संगै रहियौ,करि दूसर नाय गहियौ। बिरह अगन चाहै जितनौ जरईयौ,पल कबहु आय मिलियौ। हौ म्हारौ गिरधर नागर प्यारौ,प्यारी कबहु तो मिलियौ।

हठ

हठ हे माधौ! तोरन नाय दू। हम सौ तोर ओर सो जोरो,सुन लीजौ!होवन नाय दू। मोय बिसराय ओर को सौपो,ना जी न!होवन नाय दू। चरण हटाय कल कहो आवन,पिय प्यारौ!मानत नाय हू। कुब्जा कौऊ पुनि सौतन लावौ,सुन माधौ!मार भगाय देहू। चरणा चेरी प्यारी ह्यै रहेगी,प्राणप्यारे!तेरी ही हम हू।

रूप अनूप

रूप अनूप रूप अनूप सह्यौ नाय जावै। प्यारी प्यारौ नेह बरसावै। अंग अंग टोना साँवरा सलौना,नैनन मग हिय धसी जावै। प्रीत को रीत निभावौ तुमही,तुमसो हम रीत सीख जावै। हसत जबहि हमकू निरखौ,बंकी छबी हम मरि जावै। रमणा प्यारी अबही वरियौ,बिनु थारौ पलहु रह्यौ न जावै।

का सो कहू पीर

का सो कहू पीर का सौ कहू पीर तुम बिन राधे। जगहु सुपना आप लागौ अपुना,आप बिना कोउ नाही सुनिहे राधे। आप अती भोरी रस को पोरी,हमहु अधम नीच जनमा को राधे। पुनि उठाहिहै पुनि हम गिरिहै,आपु ना छोडत कर मोरा राधे। चरण चाह कब हिय जगिहै,कबहु टहल मोहे मिलिहै राधे।

भर आवे नैना

भर आवै नैना पुनि पुनि भर आवे नैना। नाम कोऊ सो सुनत बहवे,ज्यो बादर बरसत होय। कबहु प्रीत को देखत बहवे,कबहु ना देखत रोय। बोलत नाय कोऊ सौ देवे,आप ना बोलत होय। हरि हरि हरि हरि हेेै मेरो,प्यारी को ओर ना कोय।

चाह

चाह काहे दीन्ही अधम बिसरात। सुनत हू कितने अधमी तारे,मम बारी भयी का बात। गज गणिका अजामिल तारे,मेरौ काहे न जावे रात। हम तो हे माधौ तरन न च्हावे,मोकू दीजियो सेवा साथ। इतनो भी नाय देय सको तो,पिय दीखे सदा प्रिया साथ। हे माधो प्यारी बिनती सुनियो,दीखे गल बहिया डारौ हाथ।

सौतन बंशरी

सौतन बंशरी सौतन बंशरी मेरी। संग साथ चले,रहवै कटी ही फसी। छूवे अधर जबै,हिय जरत अरी। पौरी बाँस की सी,गुण कौन ले री। जी करे प्यारी,कर लउ चोरी। छिपा दूर दऊ,माँगे नाय देनी। अरी सुन री सखी,ऐसो नाय करनी। बंशी जान उनकी,हम नाय हरनी। वह हिय उनकी,होय वा कौ तन सी। प्यारी सोचै बैठी,कब होऊ बंशी।

विरहः

विरह बिछोहे बोरी भई सगरी। जबसौ पिय मथुरा सिधारै,भूली जमुना जल लान गगरी। कोऊ पिय बैठी मान विटप ही,देखी कोऊ बात बनावत री। कबहु उलाहनौ देवती मोहन,कबहु आप दोष निकारत री। धुनि कोई रमात ही देखी,मोहन हिय भुलावत री। मैय्या की कहे कोन हिय सो,लई माखन ढूंढे सखी सारी री। सबन ते न्यारी राधिके देखी,बैठी कुंजन हिय मारी री। खग मृग गैय्या सबहि व्याकुल,प्यारी व्याकुल सबन संग भारी री।

दुख

दुख: कहत बने न थारी बात। मै अती कुटिल अधम सौ लोगा,तुव करूणा अनूप बरसात। तुव ही कहवौ तौ ही कहावौ,मौ सौ कहत ना जात। दरस ही अरूझै कबहु नैना,शोभा सबहि मौहै बिसरात। आवो हे हरि आप सम्हालौ,कर पकर सम्हारौ प्यारी आप।

मान

मान पिया तौ सो ना बोलू। उर ही छिपावू भेद,प्रेम गिरह न खोलू। मान करू तौ सो अज,प्रीत तैरौ अज तौलू। ना रे ना छूना मोहै,नैन ओरि ना खोलू। तू बैरी तज जा मोय,बिरहनी जबै हौ डोलू। प्यारी छका देवे तोय,बोल तो सौ ना बोलू।

बाल लीला

बाल लीला मचल गयो लाला लेन बहू। हमहौ री माई गोरी मंगावौ,बहुत दिना री तौ सो कहू। पूछे माई कहा बहु करेगो,तेरो दम नाक रे करेगी बहु। सुन माई बहु सो कहा करावू,तेरी सो बहु बिन नाय रहु। गैय्या चराय जबहि माई आवू,चरण दोउ वा सो दबवाऊ। लए तेरे री भोजन बनवावू,बाबा लए नेह सो परसवाउ। सखा लए बाँध बनहु लै जावू,दाऊ हित घूंघट वा सो कराऊ। तुतली बाणी मीठौ सो बैना,प्यारी जी करिहै सुनत ही जाऊ।

बिस्वास

बिस्वास निरबल के बल राम। जग ना आस बिस्वास कोउ,जग सो न कोऊ काम। पतित हम तुम पतित पावन,तुम पतितन कौ भी राम। लेन देन सबहु आप सो,बसत आप ही धाम। अधम कुकामी कलुषित हम हौ,आप परम सुखधाम। इनकेई बल बलशाली होवतो,प्यारी भरोस एक राम।

अभिलाषा

अभिलाषा श्यामा,चरण रज चाहू। गहू निसी भौर जे ही चरणा,इन्ही महिमा गाऊ। तैल फुलेल लगाय पलोटू,मखमल सो सहलाऊ। बैठी रहू बनहि रज इनकी,ओर ठौर कहु ना जाउ। शीश तेरे सो कोमल होउ,धरै पाम तहाँ बिछ जाऊ। प्यारी चरणा दूर च्यौ राखी,बिनु दरशन मरि मरि जाऊ।

राम लीला भाव

राम लीला भाव राम लला रोटी,लै गयो कागा। अंगना ठाडै लई माखन रोटी,आवत देखिहै भागा। झूठौ रोटि पावेगा कागा,बड्यौ भाग तैरौ। हमहु कागा भयौ न काहे,बेरि बेरि टेरौ। जावत देखि रोवन लागे,दौडी आय माई पकरी। कबहु प्यारी दरस करिहेगी,नैनन मग जोहरी।

स्वप्न

स्वपन सखा मधुमंगल सुपन बखानै। सुन कनुआ कल कहा भयो रै,रैनहु दैख्यौ सबै सखा रे। पूछ हाथ लौ लांबी निकरी,हम सबहि बानर हुआा रे। अरे इतनोई नाय जे म्हारो कनुआ,जेई बानर धमाल भया रे। सबरे हसे देख दूसर कू,फाड आँख कोऊ कोऊ खडा रे। इतनेई धम्म गिरौ खटिया सो,अचरज मोय हुआ बडा रे। हाथ टटोल हम पूछ देखिहौ,मारे डर बुरा हाल हुआ रे। सुनि सखा संग कनुआ खूब हासे,प्यारी पुनि धमाल हुआ रे।

अरज

अरज सुन केशव कहा मेरो मन बोले। बिन पाहुन नाय,बन बन डोले। राह कटंक काट काटिले हौ। तेरो कोमल पाम रसिलै हौ। हाय सोच सोच मेरो मन डोलै। हिय राधा चरण तिहारौ हौ। बिनु पाहुन जब तौ जा रौ हौ। राधा लग न जावै पथ कंटौलै। प्यारी सुन नेक मेरो मन की हौ। गैय्या नाय पाहुन धारे हौ। जेई बिध ब्रज नंगे पाम डौलै। तब भली कही तूने माधौ हौ। हमहु पाहुन नाय धारौ हौ। प्यारी बलिहारी पिय बड्यौ भौले।

प्रतीक्षा

प्रतिक्षा थारी जोहवत थक गई बाट। नाहि आपु ना संदेशो आवै,सूनु आवन को नाय बात। दिवस न दैख्यौ जबसौ सिधारौ,जुग सम भई कारी रात। मात तात मोय सबु समुझावै,कोऊ पूछे न हिय की बात। सूख्यौ रोग लग्यौ देहि को,जरै चूल्हौ सम ही गात। जीवत बचते आवेगा दिन,पूछै मिलन को प्यारी बात।

उलाहना

उलाहना पिया मोय बड्यौ तरसाई जी। कल कल करे आवै कल नाही,प्रीत झूठी धराई जी। जानै न पिय कबहु मोय अपनौ,हित हमरे न आई जी। तब काहै नैन लगाय हम सौ,काहै लगन लगाई जी। आप तौ बैठ्यौ बन ठन ठाकुर,मौ पै करी ठकुराई जी। आध अधूरौ ब्याह रचायौ,कैसौ रसम निभाई जी। गिरधारी नेक आय देखियौ,प्यारी काय ठुकराई जी।

चाह

चाह चला चाल्यौ ले वाही देस। प्रेम सौ सीच्यै प्रेम उगावै,प्रेम धरियै घूमियो भेस। प्रेम हु हासे प्रेम रूलावै,प्रेम सजे सजावे केस। प्रेम देखिये प्रेम बोलिये,प्रेम होवै नेक नाही नेस। प्यारी कौ प्रेम को देस बसावौ,बचै कछु नाय अबहि शेस।

बधाई

बधाई बधाई हो बधाई घर आये गोपाल। चटक मटक चटकीलो ठाकुर,देख देख भयी सबही निहाल। मैय्या बाबा भरे आनंद सगरै,सखा सबे मिल करे कोलाल। आजु सबे मिल मंगल गावौ,लुटावौ दधि अरी उडावै गुलाल। बलि बलि सौहणे लाल पे जैहौ,प्यारी बलि बलि मदन गुपाल।

आह

आह क्रूर,अक्रूर भयो काहै। प्रेम सो हम पिय संग ठाडी थी,काहे लेऔ संग धाये। कुंज उपवन तैने सबहि उजाडै,हिय सबरे दये मुरझाये। जग सौ पाप सबहि मा भारी,पिय प्रिया विछोह कराये। हमसौ रै कौन बैर निकारौ,पिय संग ले जाये। अबहि समय तू लौट जा बौरे,नाय जीवत हमे जराय। हाय सो हमरी जर जावेगौ,तू बात सुनत नाय काय। पाम पकर करू बिनती काका,प्यारी कान्हा नाय ले जाय।

चरण वंदन

चरण वंदन भज मन चरण कमल सुखदाई। जिन्ह पग सेवत रमा उर ब्रह्मा,सुर सनकादि ध्याई। शेष महेश गुणगन गावत,वेद हि पार न पाई। सखियन सेवित कुंजन चरणा,बारि बारि बली जाई। सुंदर सुकोमल साजत चरणा,पैंजनिया सो सजाई। बंदौ चरण कमल ऐसौ प्यारी,लौटत चरणन ताई।

कबहुँ आवत

कबहु आवत कबहु आवत देखि मुरारी। दिन बड्यौ बीत्यै सुधि न लीन्ही,अब लौ काय हमारी। पल छिन जानौ कैसे कट्यौ है,काटन है रह्यौ भारी। रौवन नैन बिसार दी अबहु,सूख्यौ नैन पाणी खारी। संगीत गीत मोय नाय भावै,भावै नाम भव भय हारी। आय मिलौ नंद नंदन अब तो,करे बिनती थारी प्यारी।

पूछै बात

पूछै बात पूछै राधा हिय को बात। श्यामसुन्दर निकुंज पधारै,लिए कमल संग बंशी हाथ। प्यारी लाड सो चिबुक पलोटत,पूछ रही हिय बात। कहौ कैसौ प्यारौ टहल करू,कैसौ नेह लुटावू पूरी रात। तुम मम जीवन प्राणप्रिये,कहे कान्हा पकरि लई हाथ। दो नेहा को दान लाडली,बिनती प्यारी धरे कर माथ।

शुक लाड

शुक लाड लाड लडावै शुक प्यारी लाडली। बुलाय लाड अति कर बैठाये,किये युगल लाड अति भारी। कहा रे शुक नेक बात बता तो,कौन बात करे संग सारि। हस बतियावे युगल दोई संग,मन मोद हिय है बिचारी। निपुणा शुक भये सखिन पढाये,कहे श्यामा पूछो न बात हमारी। कहे हम श्यामसुन्दर मेरौ प्यारे,कहे सारि हमरी श्यामा प्यारी। अब लाड लडावत दुई संग बोलै,अरे प्यारी जुगल जोरि है अति न्यारी।

बिरह

विरह दरस बिनु मौ सो रह्यौ न जाय। नैन बैर निकारतौ मौ सो,पिय काहै तरसाय। जानती पिय निरमोही हौयौ,जान रोकती पकडत पाय। सखी सहेली भई पराई,कौऊ मनहु नाय भाय। इकली रहवू पिय मगन ह्यै,संग साथ छूटि जाय। अबहु हा हा करत का हौयो,प्यारी जात रोकियो नाय।

बिक्री

बिक्री बेच नींद नैनजल पायौ री। मोय छलिया छली नैन मिलाय,जे जशोदा कौ जायौ री। औगुन या कै कहत कहा लौ,मैरौ सबहि चुराया री। भली गयी जमुना जल भरवै,या नै हिय चुरायौ री। आप जाय हु मथुरा पैठौ,संग कुब्जा कौ पायौ री। हमहु जरी कौ ओर जरायौ,सौत हमहौ लायौ री। प्यारी प्रीत सरबस बस किन्हा,खौल हमहु बनायौ री।

बिरह जानिए

बिरह जानिये बिरह बिरह कहत सबहि,बिरह जानिहै कौन। बिन पियु लेवन श्वास ना भावै,जरावै शीतल पौन। चंद्र किरण शीतल अंग गडिहै,कंठ सूख्यौ हौन। जार जार ह्रदय होहि जावै,भावै हसन नाहि रौन। कबहु पवन संग बतियावै,कबहु पिय बिनु कछु न होन। ऐसो बिरहा प्यारी कौ सतावै,आय मिलो पिय प्यारी दोन।

मुरली

मुरली लाल कर राजत मुरली अनूप। सुवर्ण जडित लाल पद्म नीलम,मोतिन लटकन लटकति। बजत डोलत भुवन चौदह,सखि गोपिन कुंज भटकति। राग राधा नाम टेरत,लेवत नाम अति रति। मुदित अंग सुनत राधा,दौरत कुंज भगी जती। ऐसेहु बंशी सुनत प्यारी,कदसी टेरत सुनी।

भजन बिनु

भजन बिनु भजन कौन बिधि मनहु लगै। जनम विरथ होय पाछे मनवा,लागै नाही भजन मे। मनहु दोष धरू काय प्यारी,जे लागे निज प्यारन मे। तोकू हु प्यारो जगहु लागे,तबहु ना आवे जोरी मन मे। जौन दिना लागे जग झूठ्यो पिय प्यारौ,मन हटाये हटे न चरणन ते। पिय प्यारो जान नाम समाये,नेक टेर तो सही निज मन मे। तुरत प्रकट जोरी हिय होहि,नाय परे ढूंढन जग बन मे। ऐसेहु कृपा प्यारी पे होहै,रह जावो आप आय मन मे।

कहाँ सो पाऊ

कहाँ सो पाउ भाव कहाँ सो पाउ। बिषय कुभाव मैल भरा हिय,कैसौ टेर लगाउ। प्रीत न किन्ही कबहु साँची,माधव किस विध पाउ। हिय कठोर पाथर सम होया,उपजत भाव न लाउ। छूयो प्राण करिहौ भावमय,चरणन टेर लगाउ। आस भरोस एकौ आपको,प्यारी प्रीती बलिहि जाउ।

अटक्यो

अटक्यौ नैनास्यु दिल अटक्यौ जी म्हारा। कटारी हिय ऐसौ मार दीन्ही,सूरत साँवली दीख्ये चहु ओर। मछरी सम नैना मिलाय बैैर किन्ही,रैन न बूझ्यै बुझ्यै न भौर। जब सौ नयन नंद पूत मिलाये,भावै न बैरी नैनन कोउ ओर। रहि रहि हूक हियहि उठिहै,भावे न ऐकहु अन्न को कौर। प्यारी दरस को करिए बिनती,आवन मिलिहौ प्यारौ मौर।

चरण वंदन

चरण वंदन भज मन चरण कमल सुखदाई। जिन्ह पग सेवत रमा उर ब्रह्मा,सुर सनकादि ध्याई। शेष महेश गुणगन गावत,वेद हि पार न पाई। सखियन सेवित कुंजन चरणा,बारि बारि बली जाई। सुंदर सुकोमल साजत चरणा,पैंजनिया सो सजाई। बंदौ चरण कमल ऐसौ प्यारी,लौटत चरणन ताई।

रास लीला

रास लीला शरद ऋतु रास रसिक खैलि। सुनत मुरली मधुरै कृष्णा,दौरत आयीहि गोपिन कुंज मैलि। जमुना पुलिन रचै रास सुंदर,बढिहि देखिहौ प्रीत बैलि। गोपिन अनगिन कृष्ण उतनेई,नव कुंज डारत बाँह गैलि। मध्यै रासेश्वरी कृष्ण संगै,भौह मटकन ताल थिरक दैलि। गौल कार ताराकृति कदै,बनावतौ भिन्न भिन्न कृति रैलि। श्यामा कृष्ण पूरन चंद्र,तारागन गोपि नव नवैलि। मिलिहै भाग सुभाग प्यारी,कदै तो मुरली धुनि सुनैलि।

बिनु दरस

बिनु दरस साँवरिया हौ बिनु दरस परस प्यासी। नाहि चाकरी चरण तिहारी,नाही टहल अबिनासी। करत आस बिस्वास तिहारौ,नाहि औरन हौउ दासी। अंतरयामी जानत मन कौ,रहवू तौ बिनहु उदासी। किरपा दासी करिहौ पियजी,राखौ प्यारी करि दासी।

जगत छाडि

जगत छाडि जगत छाडि जगपति सौ लगावू। साँचो पति पावू सखी री,झूठौ संग गवावू। बिरह अगन मिटावू अबही,मिलन संग रचावू। सुरतिया प्यारी हिय बसाय,नैनन बलिहि जावू। निरखू रैन दिनन छबि प्यारी,सुधि सगरीही बिसरावू। आय मिलौ घनश्याम साँवरौ,कद सौ टेर लगावू।

सांझ सेवा

साँझ सैवा साँझ हती जौरि संध्या सैबा करन सखीहि जुटी। बैठत रही कुंजन माही टहल आपनौ आपनौ करी। सखी देखत राह जुगल कौ दई थाल सजात रही। पूछिहै सखी कहवौ तौ आवू देखत काहे दैरि भयी। पावत सम्मति पकर करहु चलत निहारन सखीन दुयी। निकुंज माही झाकत झाकत जुगल छबि देखत रही। आवत श्यामसुन्दर प्यारौ हसत पूछत सखी का भयी। सकपकायी काहै री सखी कहा तौरि पकरि चौरी गयी। कहत हसिहै श्यामा जौरि पूछत पकरि चिबुक रही। बलि बलि हौ ऐसौ प्रेम सिंधुहि डूबत डूबत नाही अघी।

पीर भारी

पीर भारी बढीही पीर अति भारी हिय कौ। जाकौ पिव सुनिहै नाय,वाकौ पीर कासौ कहौ। दिवस दिवस जुग बीतौ जावौ,बिरहा अगन कैसौ पीयौ। कहवू कैसौ निरमोही वा कौ,अौगुन खान हमहु हौ। रोवतौ नैन खौवतौ नाय,नाहि हिय अधीर हुयौ। तबै करिहौ कर जौरि बिनती,प्यारी मोहना दरस दैहौ।

भरपाई नेहा लगाए

भरपाई नेहा लगाय ब्रजराज!भरपाई तौ सौ नेहा लगाय। कौन घडी नैनहु तौ सौ मिलाय,सब गमायी हौ तौ सौ नैन मिलाय। कौन जनम बैर विधना किन्है,प्रीत जुल्मी सौ लगाई हौ कैसौ जावै निभाय। हिय पीर दिखै नाही तौ कू,कौनहु दिखावू हौ तौ नाहि दैखिऐ आय। दैवू उलाहनौ दीयौ नाहि जावै,दौष आपनौ गिनायी हौ तौ सौ कछु ना कहाय। कौन टौना तैने बैरी मौपै डारौ,रार करवै ना पायी हौ तौ संग नेकहु आय। तौरि दती जौई तागा हौतिही,प्रीत तौरी ना जावौ तौ ऐसौ लयौ फसाय। झूठी साँची रार प्यारी करिहै,नाय आवै रूसाई हौ कैसौ करू लडाय।

हौ अवगुण खान

हौ अवगुन खान कैसो नेह करू तुमसो,हौ अवगुनहु की खान। तुम कोमल पकंज समही,हमहु कंटीले हौ कांट। प्यारौ तुव तबहु मिलिहै,जबै जौहवू तिहारौ बाट। जग छाडू नाहि टेरू तौहै,कैसौ मिलिहो कृपानिधान। होय ऐसौ कदै सबै छूटे,नाहि छूटिहौ तुम्हरा भान। कौन गली चलू जगहु छूटे,रहि जावै जाद मुस्कान। आस भरौस मौहन तौहरी,तुम बलहु हौ बलवान।

नाचत लली लाल

नाचत लली लाल नाचत लली लाल कुंज उपवन। थिरक ता थई बोलत डोलत,अंग मटकन कर चलावत। झूकत कमानी सौ कटीली कटि,लली नैन तीरछे सैन चलावत। उडत पीत पटाहु मोहन,नील तारा चुनरी श्यामा फहरावत। वेणी नगिनी डोलत कटिहि,मंद हँसत पदहु गिरत उठावत। नाचत भूषण सबै अंग अंगै,पायल पद नाचत इतरावत। मुख अगै कर रखिहै ऐकौ,ऐकौ कर शिर उपरि जावत। मोडत अंगुरि बनत भली मुद्रा,नैन संगै अंग अंग मटकावत। निरत ऐसौ रस रास लीला पै,प्यारी हौहि बलिहु जावत।

आवत देखी

आवत दैखि आवत दैखि मुरारी। गागर लेत चलिहै गौरि,नैन ढूढत श्याम रसीलै। दूरि सौ आवतो दैखि सखीहि,आय मटकत चलत छबिलै। रोकेहु नाहि रूकिहै चितवनि,नैन लडिहै नागर जाय। बिसरत सुधि छूटत गगरी,लोक लाज बचीहु नाय। धम्म सौ फूटिहे माट कौ मटकी,नाही टूटिहै तबहि ध्यान। इक तौ छबि छबिली ऐसौ,वा पै मारी मोहन मुस्कान। गई गुजरी काम सौ अबतौ,जौई छूटै सौई छूटै। प्यारी अंग लगाहौ कदसी,काय बैठिहौ हम सौ रूठै।

कौन मौरा

कौन मौरा कौन मौरा गिरधर तुम बिन अपुना,साँचो इक तुव जगत सब सुपना। झूठौ जनम विरथ गमायौ,साँची हुयो जबै जाद तुव आयौ। नाही मौरा कौउ,तुव ही अपुना। देखि देखि जग रोवनो सूझै,बिनहु पिय सब सूनौ लागै। संगै ले जावौ,झूठौ तोरिहौ सुपना। जतन बतावौ जौ तुव पावू,सबहु छूटै इक तुव चाहू। मिलै संग तौरा,लिखौ लेख ऐसौ विधना।

देखूं कदसी

दैख्यू कदसी दैख्यू कदसी आवत मुरारी। नैनन कटिले ज्योहौ मीना,रेख काजल जावू बलिहारी। अलक घूंघर वारी कारी,दिखावौ लटक लटकन प्यारी। अधर गुलाबै लाल होहै,सजी मुरली अधर मुरारी। नुपुर छनन छन पगहु,डौले पाहुन बिन गिरधारी। बैठिहौ आय हियही अबही,बड्यौ दिनन तडपै प्यारी।

पसारे बैया

पसारै बैय्या पसारै बैय्या कदै दैखिहौ पिया। तडपू जलै बिनु मीना,आवौ जल बनिहै। बिरहा पीर मैटियौ अज,आवन संगै रहिहै। चंदन बन धावौ पिय,अंग लगै शीतल करिहै। नैनन जलहु जौ बन जावू,पायन तौहरै ढुरिहै। झरत झर झर अश्रु बूंदि,हा! नाथ संग रखिहै। बिरथ दिनन रैन जावत,बेगि आय सुफल करिहै। प्यारी सो जीवतो बनिहै न तुव बिन,करि चेरि निज धरिहै।

न जीवतो बने

न जिवतौ बने अज न जीवतौ बने पियु बिन। नाहि रह्यौ जावै प्यारौ,कैसौ काट्यू अलूनी रैन दिन। बिनु दरस नीरस जनम हौयो,बिष सम हौयौ तुव बिन। झरी नैनन लगिहौ कैसौ,कहा छिपावू दैख्यौ न प्यारौ। ब्याकुल बिरह मारी प्यारी,कौन आय बिरह मैटिहौ हमरौ। सौबत बिरथ गमावू रैनहू,खावत गमाय दैवू दिन। तबहू दासी पुकारिहै तुमहि,प्यारी रहि न सकिहै तुव बिन। आवौ आवौ गिरधर बैगि पधारौ,आय जावौ प्यारौ अबहि। दरस पाय नैन शीतल हौय,चाह्वौ पावू दरस तबहि।

नांगौ कन्हाई

नांगौ कन्हाई चौपाल घूमत नांगौ कन्हाई। अलक घूंघर छौटौ केशा,मोर पखा मोतिन मुकुट फसाई। करधनी बड्यी सुहावन सोहै,पायन नुपुर छन छनाई। नील बरण शौभा अतिहि भूषण,चमके रंग बिरंग नगाई। बिसरी सुधि गोपिन की अजहु,बिनहु बसन दैखिहै कन्हाई। गोपिन नेक माखनहु पै,दैखिहौ कैसौ नाच नचाई। मिलत लौना खावत लाला,अंगुरि गोपिन ओर बढाई। दैख सरलता चपल मोहन कौ,प्यारी बारि बारि बलि जाई।

रसराज

रसराज रसमत्त रसीलौ रसराज। सुवर्षित अधरामृत रसै,चचंल नैन सैनानी जुटै। भुजपाश गाढालिंगनै,नव चपलता करत बढै। उनमत्त चुंबित सर्वदिशि,रस सैनानी रणहु लडै। बिलसै सेज रणभूमिहु,दुई जीतत हारत कौउ न पडै। अद्भुदै रसकेलि रण,जीतै दुई शूर दुई लडै। कर जौरि पायन बैठिहै,प्यारी दरस दौ बिनती करै।

हिय वृन्दावन

हिय वृंदावन अहिहौ हिय वृंदावन बनावौ। जुगल धावौ हिय माही पधारौ। हियहि करौ रसकेलि जुगल दुई। हियही मोद अनुपम बरसावौ। रस नाडी लता पता बनाय देओ। प्रीती टहल कौ रस सरसावौ। गल बहिया डारै दुई आवौ। संग संग वृन्दावनहि लगावौ। पुष्प खिलिहै प्रेम हिय माही। हा! जोरि हिय ब्रज माही पधारौ।

सजावत गलियन

सजावत गलियन सजावत गलियन आवेगे मुरारी। पलकन झार बुहार लगावू,हिय सिंहासन मलूक सजानी। साज श्रंगार अनूप धरावू,पिय हित अबही सज जानी। कुसुम सौ नील कमल कौ लावू,मोतिन को माल नीकौ पुरानि। अंगना गलियन चौक सजावू,रंग सौ प्रीत को सबही सजानी। करहु पकरि पिय बैठावू,आपहु पायन नीचौ बिठानी। कोमल अंचल सौ पगा पलोटू,नैनन जल सौ पायन धुलानी। जानत हौ आवेगौ प्यारी कौ गिरधर,देर भई नाहि आवन टलानी

रट राधा

रट राधा रट राधा नाम हौ रसना। गावत रसिली नाम जो,कटिहै सबहि बाधा। निष्काम प्रीत होहिहै,मिलिहै प्रेम अगाधा। भजै जो श्यामा नाम कौ,सब साधन सध जाय। एक लली कौ कृपा तै,सबहु कृपा मिल जाय। भजत स्वामिनी नामहु,डौले पाछै कुँवर कन्हाई। लाडली जु के नाम तै,बडौ बडौ ने सुधि बनाई। रटै न राधे नाम जौ,वा सम निर्धन कौन। जीबन मरन विरथ वाकौ,जगत होहिहै बौन। रै मन आठौ याम गा,प्यारी जु कौ नाम। टेरत नाम पाहिहै,निज चरणन बिश्राम।

हे राधिके

हे राधिकै हे राधिकै रस स्वामिनि कृपा अधमहु कीजिए। निज जान दासी आपनौ,सौरभ चरण रज दीजिए। करिहै कृपा बिनती करू,कर जोरि सर पायन धरू। हा भामिनि कर कौर कृपा,कर शीशही धर दीजिए। मम सम कुटिल अधमन बडै,चरणन तौरे आयै पडै। तौ भी कृपा हे लाडली,अधमन ऐही पे कीजिए। नित सेवा मे टहल करू,बन चकोरि दरशन करू। ऐसो हे करूणामयी मौहे,जान आपनौ वर दीजिए। कृपा कीजिए कृपा किजिए,लली लाल नेक कृपा कीजिए।

अनुपम माधुरी

अनुपम माधुरी लली लाल रूप अनुपम माधुरी। सहज सलज्ज मुस्कनि,चितवनी एकहु बँकी। कर्णफूल गुंजैहु माला,कर किंकनहु कंकी। अधर रचिहै लालीहु,बीरी मुखै धरीही। करधनी दुईन सजीहै,नुपुर पगा बजीही। बसन भूषण एकैहु,तापै कौन मलूकौ लगी हौ। नकबेसर झुकी ढुरी सी,नीको लागत लली लाल सौ।

गगरिया फोरी

गगरिया फोरी अरी! मोरी फौरी गगरिया ही,दधिहु सब बिखराई री। छिपत ओट कदंबहु ठाठौ,साध निशानौ कंकरिया मारी। लगत तड् सौ टूटिहै मटुकी,उपरि मैरो दधि बिखारी। निकारि दात हसिहै दारी कौ,नेक लाज ना आई री। कूदिहै कदंब सौ करत बिगारी,आवत दैखि मोय मुरारी। दिखाय अँगूठौ भगिहै दूरि,चिढ चिढावत तारे मौरी। मै जरू और जौरि हसिहै,अरू सींग बनायौ री। चाह्वू ऐसौ दरस हु करवै,बिनु दरसन हियहु तरसै। नैनन दीजौ ऐसौ मोय,कबहु लाल हमहु पै बरसै। पावू दरस कदी,प्यारी कौ नैन दिरावौ री।

जावू बलिहार

जावू बलिहार रमणा! सूरतिया जावू बलिहार। श्यामल तन छबिली छबी,कुंडल शोभा अपार। टेढो पगा शीश सजिहै,मछरी नैना कटार। पग उपरि धरिहै पगा,टेढो सौ कटि कटिली। कर कंकन शोभित सजीलै,अधर धरी मुरली। सौ सौ नुपुर सजिहै पायन,एकौ धरै ऐकौ है खड्यौ। मुस्कनि ऐसौ टौना मारिहौ,सुहावे है सोहणी बड्यौ। मोर पखा पग उपरि लगिहै,मोतियन माल सजी। गलहु माल सोहवै न्यारी,करधनी लटकन बंधी। दरस करिहै ऐसौ सलौनौ रूप कौ,प्यारी बावरिया भयी।

सेज

सेज बिखरीही सेज कैसौ हौ बिहारी। चाँदी कौ सैजा,बिछिहै श्वेत झीनौ चदरा। बिखरीहौ कुसुम,रस केलि बादै बिखरा। सिराहनो हौहि नरमा,पडिहै सिल चदरा। बिलसै दुई ज्यौ हौहि,दामिनी संगै बदरा। रैनहु बिताई पीबतौ,पीबतौ अबहु न अघरा। ऐसौ रसराज रसिकिनी,दरसहु ब्याकुल मौरा मनरा।