बरमाल लीला

बरमाल लीला
कैसेहु सिया बरमाला डारै।
नीलमणि कछु ऊँचौ सिय सौ,कैसेहु प्यारी उचक माल डारै।
बड्यौ संकट हिय जानकी हौय,मुख सौ बैन कहत न जारै।
उत्त हिय ऐसेहु राम कौ हौहि,मरजादा बश झुकन न चाहरै।
समुझ दोउन हिय लछमण बाता,करत उपाय भाई चरण छुवा रै।
ज्योहि उठावन अनुज कौ झुकिहै,चटपटि सिय माल राम कौ डारै।
जय जय जय धुनि करत सबहि,प्यारी हिय मोद अतिहि बढा रै

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