Posts

Showing posts from June, 2021

कुमुद विजयोत्सव

सावधान ! जो युगल के रसविलास को पुष्प के खिलने जितना  सहज,सुकोमल और पवित्र माने वह ही पढे। . -----------------  कुमुद:विजयोत्सव्  ----------------------- . मंगलम् युगल: दर्शनौप्रथमऽभिलाष: सखिन: निभृतौकुंजतिष्ठति।। . सर्वां प्रतनौधवल: आवरणपट्टऽवघट्टच पुष्पशय्यापुष्पमध्यै पुष्पचूडामणिकुमुद्वौ प्रफुल्लप्राप्यंहर्षति।। . कदाचन सम्पूर्णैक्षप: अतीवौऽतीवप्रफुल्लेनस्पर्धातुऽयासेन कुमुदद्वौक्षणैक्षणै अलस: जृम्भात।। . यस्मात् युगलौगतक्षिप: चर्बिताम्बूलविटिका सुगन्धै सम्पूर्ण: निकुंज: सुगन्धितोऽस्ति।। . तौ अवलौक्यतै सहसा सर्वदृष्टि रसौन्मादिनिकौमुदी कञ्चुलिकेनचक्षऽभयन्तरम् रसपूरितघटकुचौ नीलप्रतिकौस्थित:।। . दृश्यं च सखिनां अवबुध्यति विजयीकुमुद: प्रफुल्लौस्पर्धातुगतरात्रौ अंतत: ।। अधुनां स विजयोत्सवनिर्हायहित: "प्यारी" तौकुमुदौ एक: स्रकगुम्फतैसह:प्रमुदितऽलिन कुंजेषुचल:।।। . . ---------------------कमल का विजय उत्सव--------------- . प्रसंग----- युगल के मंगलमयी प्रथम दर्शनौ का वर्णन। . लीला विस्तार-------------- परम मंगलमयी युगल के प्रथम दर्शनौ के लिए सखियाँ निभृत निकुंज मे खडी है। कोई स...

खन्डित नाहिं करो नलिन री

खन्डित नाहिं करो नलिन री,हे पद्म कलेवर तरूणी नवल। अनुग्रह भरि करो कटाक्ष मानिनि,नयन धरो कछु विकसिद कमल। उत्कंठित रंज अभिसार सार हित,अलि अनुमोदन स्मित करो सुफल। कुच पराग भार उच्चंड भये,देय अधर पात्र इन करो सरल। उरू देय शीश करो सहज उद्वेलित,रस कूप नितंब सरस पियात। अंकित पयोधर मलयज चित्रावली,क्षुद्र उष्ण श्वास निर्जल तपात। रस आवेगित कंपित बिंब अधर,रसोज्जवल सहज याचक करो दान। पुष्पहार कंचुकी आंदोलित अवलंबित,करो निज अनुज्ञा लेउ कर थाम। मुख कुम्हलात गात भरे स्वेदा,अरूण नयन भरे जल जात। काम रूचि भयी अति उत्कंठा,नाहि कामिनी काम करे कोई बात। पटु अलिन सम्मुख करि प्रियतम,कही अतिशय सुख की गत रात। यद्पि आतुर प्रणय प्रेम स्वयं,व्यर्थ तजो निशि क्यू मान। देखो रस लंपट उर्ध्वनयनी,गुम्फित करि बैठे कर गुंजा माल। अति रमणीय सेज रची मनमोहन,राजि समर करो आरंभ तत्काल। प्रफुल्ल कुमुदानन रासेश सदा,रस वांछा निमित्त आकुल कुम्हलाए। रस दृष्टि रमणी करो अनुग्रह,पुनि प्राणन गए रासेश्वर आए। नित सुख वर्षणी वर्धनी प्रीतम,अद्य क्यू रस आकुल तरसाए। माना मान हेतू रस वर्धन,पर बहोत हुई अब पिय कंठ लगाए। सुनि वचन अलिन मंदस्मित प्रसा...

मनमोहन मैया डरपावे

मनमोहन मैय्या डरपावै। गौरस पीयत गिरात धरनी जई,खीझी माई तऊ लाल बतावै। कीयौ उधम अबिकै लाला तनै,जेई साँची सुनि लै कान लगायै। तउ दै झोरी बाबा डारू तौय,डोलै घर-घर तो तै टूक मंगायै। नाय मैय्या बाबा मिलिहै तऊ,नाय कोउ सखा सखिन बचावै। योई सुननी मुख उतरि गयौ री,लए दौरि लला मुख अंचल छिपावै। देखि हिय गयौ पुलक री "प्यारी",मायापति मैय्या संग माया रचावै। _ ______जब लाला ने दूध पीते पीते भूमि पर गिरा दिया तब मैय्या अत्यंत खीझकर लाला से कहती है रे लाला भली प्रकार से कान लगाकर सुन ले यदि अबकी बार तैने कोई उधम किया न तो मै सच कहती हू मै तु़झे किसी बाबा की झोली मे डाल आउंगी।फिर वो बाबा तुझे घर घर ले जाकर तुझसे भीक्षा मंगवाएगा और तब तुझे न तो कोई मैय्या बाबा ही मिलेंगे और न ही तेरे कोई सखी सखा ही तुझे बचाने जाऐगे।अरी ये सुनकर लाला का मुख एकदम से उतर गया और उसने दौडकर मैय्या यशोदा के अंचल मे अपना मुख छुपा लिया है।यह देखकर प्यारी सखी का ह्रदय तो अत्यंत पुलकित हो उठा कि मायापति किस प्रकार मैय्या संग माया कर रहे है और मैय्या किस प्रकार इस मायापति को ऐसी माया रचकर डरा रही है।

कुमुद विजय

सावधान ! जो युगल के रसविलास को पुष्प के खिलने जितना  सहज,सुकोमल और पवित्र माने वह ही पढे। . -----------------  कुमुद:विजयोत्सव्  ----------------------- . मंगलम् युगल: दर्शनौप्रथमऽभिलाष: सखिन: निभृतौकुंजतिष्ठति।। . सर्वां प्रतनौधवल: आवरणपट्टऽवघट्टच पुष्पशय्यापुष्पमध्यै पुष्पचूडामणिकुमुद्वौ प्रफुल्लप्राप्यंहर्षति।। . कदाचन सम्पूर्णैक्षप: अतीवौऽतीवप्रफुल्लेनस्पर्धातुऽयासेन कुमुदद्वौक्षणैक्षणै अलस: जृम्भात।। . यस्मात् युगलौगतक्षिप: चर्बिताम्बूलविटिका सुगन्धै सम्पूर्ण: निकुंज: सुगन्धितोऽस्ति।। . तौ अवलौक्यतै सहसा सर्वदृष्टि रसौन्मादिनिकौमुदी कञ्चुलिकेनचक्षऽभयन्तरम् रसपूरितघटकुचौ नीलप्रतिकौस्थित:।। . दृश्यं च सखिनां अवबुध्यति विजयीकुमुद: प्रफुल्लौस्पर्धातुगतरात्रौ अंतत: ।। अधुनां स विजयोत्सवनिर्हायहित: "प्यारी" तौकुमुदौ एक: स्रकगुम्फतैसह:प्रमुदितऽलिन कुंजेषुचल:।।। . . ---------------------कमल का विजय उत्सव--------------- . प्रसंग----- युगल के मंगलमयी प्रथम दर्शनौ का वर्णन। . लीला विस्तार-------------- परम मंगलमयी युगल के प्रथम दर्शनौ के लिए सखियाँ निभृत निकुंज मे खडी है। कोई स...