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Showing posts from February, 2025

युगल निरख

युगल निरख, शीतल भई छाती। मूक पीयो रस सुधा छबीलौ, कहन सुनन; बातन नाय आती। नीको लाल मलूक सींव परै, अंतर ललक, निरखि बटि जाती। ललित लाडिली अनुप मधुरै, मंद हसन, झुकी निरख लजाती। कुमुद मूल एक दोउ निकरै, अंग-अंग "प्यारी", जूरी सब पाती।

स्तुति

हे विवस्वानसुते! देहि अनुराग युगलचरणौ। निजऽस्तित्व समाहित सर्वैसर्विस्मृतेषांत्वंसदृश:।

नहि मौन धरौ

नहि मौन धरौ,कछु बात करौ। भई रार जई नहि बात नई,तजि भूलौ बिसरौ,उर हाथ धरौ। अंतर उपवन बंजर सम वन,फागुन लावौ नेह लाड करौ। अंचर ढरकि मनुहार करी,नाहि तजि जावौ आय बाँह वरौ। प्रीतम सैय्या दै गलबैय्या "प्यारी" झुकि झुकि मनुहार करौ।

अरी का कौ फाग

अरी का कौ फाग,काय हर्षाती। जरे बरे दिनु आय मरै,हू तौ बरसौ बरस योई कल्पाती। का केई संग होरी मोरी होई,जिन संगै चही उन कासौ मनाती। सुन जा दिनु हाथ चढ्यौ दारी के,दौरा दौरि दौरि"प्यारी" रंग खिराती।