युगल निरख



युगल निरख, शीतल भई छाती।
मूक पीयो रस सुधा
छबीलौ, कहन सुनन; बातन नाय आती।

नीको लाल मलूक सींव
परै, अंतर ललक, निरखि बटि जाती।

ललित लाडिली अनुप
मधुरै, मंद हसन, झुकी निरख लजाती।

कुमुद मूल एक दोउ
निकरै, अंग-अंग "प्यारी", जूरी सब पाती।

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