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Showing posts from July, 2022

कैसे होते होंगे

कैसे होते हौगे खत वो,जिनको पढते होंगे प्रियतम.. * शिकवै शिकायत होते होगे,या की फिर तारीफै पिय की झूठी-मूठी गारी रूसना,होते होगै न ज्यादा या कम....... * नीली लाली स्याही या तौ,अश्रु नैननि की होती होगी भरि भरिके कलम नैन की मे,हिरदै के भाव एक एक ही दम.... * कागद क्या नैन परस्पर कै, दोनो ही ठौर के होंगे न आखर न होते होगे या ,होते होगे बस भाव परम ...... * खुशबू क्या इत्र की सी से,महका सा खत लेते होंगे या प्रतिक्षा के सौंधेपन से,गीलै सीलै कुछ कुछ से नम...... *  उलाहने ताने पढ हसते होगे,या गम्भीर विषय सी चर्चा से मुख मंडल पर छा जाते है,घने काले विरह व्यथा के घन...... * जैसी जो हो कुछ बतलाओ,लिखना एक खत है हमकौ भी "प्यारी" रूचि रस से भर लिख दे,तो पढ लेंगे न मेरे प्रियतम..... * तो पढ लेंगे न मेरे प्रियतम.....

हाय सखी

हाय सखी ! देखै न राधारमण। नैन चुरौयै फिरतै मौ सौ,नाय पतौ कौन कारण। आई नाय मिलनौ या सौ,अरी रूठै योई संभावन। करी नाय सुनि बतिया ह्यौ,कछु दिना सौ भावन। ऐजी सुनौ अबिकै छाडी दौ,होय नाय पुनि दोहरावन। "प्यारी" परत पाय बिनती हतौ,दासी नाय दीजौ बिसरावन।

पुकारि सुनो श्रीराधा जु

पुकारि सुनौ श्री राधा जु। वृंदा विपिन बसू जग छाडि,महल ना-तौ ड्यौढी ही पडि जावू। सगौ संबंधी सबहु तौ मानू, जग  झूठौ  तै  ना मोह  राखू। पद चापन चौपन उर एकौ, कोउ दूजी ना चाहना उर लावू। खिली अधरन हासी हित खेलू,मिली प्रीतम संग नित खेल राचू। ब्रज ठकुरानी सुनौ हे महारानी,"प्यारी" किरपा भरै द्वौ नैन चाहू।

नेक हमें मिलियौ

नेक हमे मिलियौ तौ राधारमण। तऊ देखियौ कहा कहा करियै ह्यौ,कौरी नाय जानियौ कहन सुनन। टेढी लकुटी सूधी करि दीजिए यौ,देय टैढे सगरै सवारि बचन। बाँधि सखियो संग मिलि लएगे तौ,फिरि लयै अबलौ उरकी करन। हासि परिहास भए भतैरे अब लौ,"प्यारी" नाय जाय दू जो करियौ जतन।

गयै कित्तकू मेरै

गयै कित्तकू मेरै गिरधर,जौ अबलो नाय जु लौटै। जे नैनन बाबरै तौ बिन,दरस नित चाहतै तौ-के। बैन कहा हिरदै के पूछौ,निभावै साथ इन्ही-कै। कहा चलियै हमारि कुछ,जोर कहा म्हारा कुछ जी-पै। "प्यारी" पिय विनती है तौसो,बारि एकही तौ मिल लिजै।

उर चंदन करि

उर चंदन करि लाड लडाऊ। सुभग सलौनै दोऊ लाल लाडिलै,निज कर सौ अंग अंग फैराऊ। ताप शाप सब बिरहा हरिकै,हरि हर कौ हर बार पेहराऊ । शीतल करौ अब नाथ मोहि कौ,"प्यारी" कछुक काम तौ आऊ।

धन जीवन

धन जीवन इन्ही कै भाग। चंदन अंग अंग जोई लिपटै,करि निछावर अपनपौ आप। मौतिन माल मुकुट सब लटकनि,अरू मोर पखा सजियौ पाग। नुपुर कहै कौन मुख रसना,चूमत चरण निशि भौर सौ रात। लकुटि बन्यी काठ जिन तरूही,मानौ सुफल उन्हीकोई गात। "प्यारी" कछुक जतन करि अबही,कहा योई जीवन विरथ बितात।

गोवर्धन गिरिधारी रे

गोवर्धन गिरधारी रे,मोहै भावै कुंज बिहारी रे।। पखा मोर मुकुट लटकन लट अलकन,परी घूंघर कारी कारी रे।‌।मोहै भावै० नक बेसर तिलक भाल टीकौ चंदन,कारै कपोलन फैरी लाली रे।।मोहै भावै० फबी गल बनमाल अधर मुरली धर,बही मधुर बयार सुर वारी रे।।मोहै भावै० लचक मचक अचक कछु आडी टेढी,चलै चलनि चाल गज वारी रे।।मोहै भावै० मोहित मोर मृग शुक पिक केकी,री"प्यारी" मोहन मोह सब हारी रे।।मोहै भावै०

फूलनि फूल देखिकै फूलै

फूलनि फूल देखिकै फूलै। मधुप अनौखो ऐसौ रस लौभी,सुमनि आप आय गल झूलै। मृदुता देखि ऐसी अरू सौरभ,गए निजकौ मान भान सब भूलै। जे नंद कौ छौना मौहना ऐसौ अरी,जाए लगै सोई हसि हसि कुलै। सखि ऐसौ शर "प्यारी" यौ गिरधर,लगै जिन हिय करै अतिव दुकुलै।

आजु सखी री देहि प्राण आए

बधाई हो आजु सखी री! देहि प्राण आए। उन्मादित चहु दिशी पौन बोरि,तपतौ ह्रदय घन आनंद छाए। पीडा क्लैश नाय कोऊ कौ लेश,दुख: भंजन आय बिरह ताप नसाए। कछु कहा मौपे अरी बारू जे यापै,लाज सौ मरी खरी नैन झुकाए। सगरी तिहारी "प्यारी" दासी जनम की,छाडियौ जोई चहै जोई लई जाए।

काक दूतं

-‐-----------------------••••••••काकः दूतं•••••••‐--------------- ● कुन्जेषुतिष्ठौ खगः मृदुकलरवश्रुत्वाम् श्रीतरूणी निमग्नितः । तद एकः काकस्यस्वरं श्रुणतः श्रीराधा अतिविस्मितौभूत्वा तम् पश्यति। इति दृष्टं सखीललिता सहमन्दहासच्सुमधुरवचनौ महाभाविनै पृच्छति। सखि किम् कारणेतु तेषाम्ऽधुरकलरवं त्यजः सः काकः कर्कशौध्वनि श्रौणति। एतत् श्रुत्वाम् सम्मोहितौसमः काकऽकलरवं कृष्णमोहिनी इति वदति। सखि ! सामान्यत: सर्वैकाक: काह! काह! इति धवनि श्रृणु उच्चारति। अद्य: स: काक: आऽ! आऽ! इत्तथम् कलरवकर्तुं किं त्वं न श्रुणौति? स: श्रुत्वां ! ललितादिसंड्गै सर्वाणि सखिन् हसिवदतिचलाडौ: चिबुक:पलौटति। अहो सरला: ! श्यामसुन्दरौऽद्यपि न इयात: इतिकारणौऽस्तु स: त्वं अनुभवन्ति। न सखिन् स: निश्चितौऽस्मि एष: काक: मम् प्रियतम: दूतौ भवति। इदृशं कदापि श्रीकृष्णौ कस्यऽन्यत्रौ न तु मम: प्रतिक्षयति। यदा स: वदति प्रष्ठै तदा यत् प्राणप्रियतमौ समीपै सहसा प्रगट्यति। हृदयै मिलित्वां तेषां दृश्यै सर्वाणि सखिन: हृदयै शीतलौऽपि भवति। 🦚 _______ लीला _______ सूर्य और चंद्रमा के मिलन का समय है।कुन्ज मे बैठी हुई श्री प्रियाजु पक्षियो के मधु...

चित्त चेत अबहु ना

चित्त चेत अबहु ना तौ कबहु भजेगौ। माया माय दुलारि लै अंकनि,फसिकै पुनि पुनि जीवेगौ मरेगौ। विषधर विष कै काल गाल मै,जाय पाछै बौरे फेर हाथ मलैगौ। जर्जर काया झर झर जब परिहै,कुढि कुढि दिना येई याद करेगौ। "प्यारी" वारी जग पाछै कछु कहनौ,निज संवरौ कछु भजन भजेहौ।

पुकारूँ श्रीरमण

पुकारू श्रीरमण भरि भरि नयन। कोठै अटारी धरणी याए सेज,चढी पडी निहारू राह सजन। भूली बिसारी मिलनी बात कोई,रही याद एक बिरहा तपन। तौ छलिया छल कीजौ न मौसौ,पहलौई छली ह्यौ तौ भाग बैरन। आवौ जो गिरधर बात बनै ताई,ना तौ मरि जाय "प्यारी" बिरहन।

श्रीराधारमण मन पावस

श्रीराधारमण मन पावस भाई। चपला नागरी घन नागर संग,लिपट चिपट अति अति दमकाई। द्रुत गति कदि मन्दित स्वर गर्जन,रस बूंदनि अंग स्वेदा बरसाई। शीतल भए घन द्युति कनक कामिनी,निरखि "प्यारी"मनौ मन हरषाई।

प्यारै पिय

प्यारै पिय !ऐसी का कीन्ही करनी। गिरी सम भार धरयौ उर मौरे,नैननि जु  दीन्ही जमुना भरनी। छब झलकी पल चल चित्त चंचल,छनिकही आय जाय सब सपनी। होओ नाही नाही होओ सबही,जानू नाय साँची झूठी कथनी। "प्यारी" बिगारी  बात बनत सब,छाडी दई अधर बीच जलनी।