पुकारि सुनो श्रीराधा जु

पुकारि सुनौ श्री राधा जु।
वृंदा विपिन बसू जग छाडि,महल ना-तौ ड्यौढी ही पडि जावू।
सगौ संबंधी सबहु तौ मानू, जग  झूठौ  तै  ना मोह  राखू।
पद चापन चौपन उर एकौ, कोउ दूजी ना चाहना उर लावू।
खिली अधरन हासी हित खेलू,मिली प्रीतम संग नित खेल राचू।
ब्रज ठकुरानी सुनौ हे महारानी,"प्यारी" किरपा भरै द्वौ नैन चाहू।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया