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Showing posts from May, 2024

सखि रैन

सखि रैन कहौ किस भाँति बिताई। द्युति दौरि गई अंग रैन विचारिकै,टेढी रमणी देख रमण मुस्काई। इंगित करि इक सुमनि ढुरकितै,रहै हिरि तजि जोई भ्रमर ललचाई। रस छाप दृश्य भई कुच कछुक तई,बही पौन जई अंचल ढलकाई। फसि वेणी देखि कंकण नग नागर,काढि "प्यारी" लेई लाल ओरि बढाई। हसै मोहन निज पटा दिखाए,जो लली नुपुर लटिकै पायल खोई पाई।

अवतरै श्री राधारमन

अवतरै श्रीराधारमण आज। पुलकित मंज्जरी किंकरी सखिन,पुलक ह्रदय सुख संत समाज। अनुपम रूप छबि मदमाती,शीतल होय निरखि मुख ताप। चटिकाय अंगुरी तोरि तृण निरखौ,"प्यारी" हृदय सिंहासन कियौ विराज।

रूचि रूचि

रूचि रूचि नेह सौ लाड लडाए। ब्रज लाडिलै दुई रस वपु धारै,एक करि रचि खेल खिलाए। तजि अंजन कौर कपोल विधारै,सब भूषण बसन अरूझै सुरझाए। बिनही कहै करै बात चाव रचै,"प्यारी" टहल महल यूँही ना पाए।

इस विरह व्यथा को तुम क्या जानौ?तुम ठहरै अखिल विश्वपति,परमहंस परै मोह प्रेम रति।

इस विरह व्यथा को तुम क्या जानौ? तुम ठहरै अखिल विश्वपति,परमहंस परै मोह प्रेम रति। रस मोह पाश सब तुम क्या मानौ? तुम ज्ञानी तम दीप जलाते,पथ पथिक पंथ सब स्वयं बनाते। पथ विहिन पथिक मर्म तुम क्या जानौ? तुम इच्छा तुम भाति चलै सब, प्यारी और चहै क्या तुम फर्क पडै कब।  क्या सम वस्तु सा जीवन तुम क्या जानौ? इस विरह व्यथा को तुम क्या जानौ? पीड सूखी लता कौ तुम क्या जानौ?

मौहै जानि ना कदि अपनी।ज्यू बालक खेलत खेल खिलौने,माटी ढोल गेंद ढफ ढफली।कदि बोलत बोल ना‌ मीठै सलौने,दुराई सदा आजु दुरै कलही।प्यारी" हारी अब करि करि बिनती,काटै दिन रौवै अब सबही।

मौहै जानि ना कदि अपनी। ज्यू बालक खेलत खेल खिलौने,माटी ढोल गेंद ढफ ढफली। कदि बोलत बोल ना‌ मीठै सलौने,दुराई सदा आजु दुरै कलही। प्यारी" हारी अब करि करि बिनती,काटै दिन रौवै अब सबही।

सैय्या,मौसो रूठन ना खेलौ खेल।भयी जो भयी देओ बात बिसारौ,गैय्या !जानि निजकी जु टेरौ टेर।पीर बढी जाय पल छिन भारी,बैय्या! गहि अंक लगा करौ मेल।बीरा लाई बस अधर भरौ रस,छैय्या!निज तन की ढपौ ढुरि देह।बहोत हुआ चलौ मान तजि दौ,दैय्या!"प्यारी" का सौ यौ सीख्यौ बैर।

सैय्या,मौसो रूठन ना खेलौ खेल। भयी जो भयी देओ बात बिसारौ,गैय्या !जानि निजकी जु टेरौ टेर। पीर बढी जाय पल छिन भारी,बैय्या! गहि अंक लगा करौ मेल। बीरा लाई बस अधर भरौ रस,छैय्या!निज तन की ढपौ ढुरि देह। बहोत हुआ चलौ मान तजि दौ,दैय्या!"प्यारी" का सौ यौ सीख्यौ बैर।

अद्भुत श्रीराधारमण

अद्भुत श्रीराधारमण श्रृंगार। पाग पखा लर मोतिन झूमका,बेसर तिलक ललित बलिहार। कंकन कर केयूर कटिबंध,मल्लिका पुहुप उरस्थल हार। पैंजन नुपुर कनक लकुटी टेक ,"प्यारी" मंद हसन केसौ परिहार।