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रमण म्हारी निंदिया

रमण म्हारी निंदिया लौटावौ जी। खुलै नैननि जग सब दीखै, नैननि बंद तऊ आप,नैननि ओरि जग सौ फिरावौ जी। जग धंधौ जागत सब जब लौ,थारै सुपन सलौनै बंद आत,सुपन आय दरस दिखावौ जी। खोटै जानत हम सब बैन तिहारै,चहै छुपै फिरियौ दिन रात,चोरी करि पाछै मुस्कावौ जी थारि करि मनुहारी हारी "प्यारी" ,आय दरस दिखावौ जु लाल,जागत सौवत जैसौ आवौ जी।