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Showing posts from October, 2023

झूलन सामने

झूलनि सामन रीत हो सजनी। बरसत बदरा उमड घुमड बहि,अंतर हठी मेल बात कौ सजनी। भीजत साज सिंगार गात सब,भीजत हिय हित प्रीत सो सजनी। जावत छोर ओढनी उर बँधिकै,सरसत जई झौट खात वौ सजनी। नैननि लेत सिरात हिय "प्यारी", मुस्कनि संग झुकी जोट जो सजनी।

झूलत hindor

श्री राधारमण झूलत हिंडोर। चंदन पाट ताग पिरै कुसुमा,श्री जमुना तीर कदंब किलोल। हरित पाग धारि हरेई बसना,हरे सखिन सब उरहि विभोर। द्युति चमकि बूंदनि परि रिमझिम,विनय करि नैननि लली कोर। "प्यारी" सहज मानि आनिकै बैठि,सखि ऊँचेई ऊँचै देय हिलोर।

मोहे यू

मौहे यू सामन भात सजनी। नवल पात नव गात जड चेतन,नित्य नवी उर बात सजनी। प्रीत मिश्रित पौन मौन अति बोलति,हित केलि जि ललचात सजनी। डारि हिंडौरा सखि डार तरू कुंजन,जोडत जोट पदचाप सजनी। हरी हरियारी हर ओरि हसत सब,जई सुमनि निरखि मुस्कात सजनी। सरस बखानि अरी लाल रस सामन,"प्यारी" बलि बलि जाय इन साथ सजनी।

जग तारण

जग तारण कारण लली आई। करि लाल संग रास रस लीला,प्रीत रीत जग नवी सिखाई। बिषय भोग तजि नेह परस्पर,प्रेम साँचौ कहा आप बताई। दाँव धरि निजता रस द्यूत मे,प्रिय प्राण बनी आप गमाई। तत्सुखमयी लीला रचि रूचि सौ,प्रेम गुरू बनी प्रेम लुटाई। अति कहै मुख कौन सौ"प्यारी",अथाह जलधि कँहा माट समाई।