झूलत hindor

श्री राधारमण झूलत हिंडोर।
चंदन पाट ताग पिरै कुसुमा,श्री जमुना तीर कदंब किलोल।
हरित पाग धारि हरेई बसना,हरे सखिन सब उरहि विभोर।
द्युति चमकि बूंदनि परि रिमझिम,विनय करि नैननि लली कोर।
"प्यारी" सहज मानि आनिकै बैठि,सखि ऊँचेई ऊँचै देय हिलोर।

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