तुव बिन पिया
तुव बिन पिया
हिय की ना जाने कोऊ तुव बिन पिया।
पाती हती बाँच सुनाती,हती जो निकरी काढ दिखाती।
सकै जौई चीर तो चीर दैवती,पिय बिनु कैसो जरत दिखाती।
कैसौ मिलनौ ब्याकुल रहवती,अकुलत पल छिन दई बताती।
नाही हिय कपाट खुलिहै,जोई खोल सबन कू प्रीत जताती।
कहै सबै ढाप रखिहौ प्रीती,कहै प्यारी मै तो ढोल बजाती।
काय कू छिपावू प्रीती आपनौ,करीही प्रीत नाय चौरी कराती।
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