अलबेलै रमण Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 25, 2023 अलबेलै रमण मुस्कात। देखि कुँवरि रस रूप लाडिली,अंतर मेई ललचात। कोवलता अंग छूवत बनै नहि,धरनौ कर सकुचात। दशा अंतर जानि पिय प्यारी,सहज निकट आप-आत। भीजी गयौ सखी"प्यारी" सब कछु,होए नैनन बरसात। Read more
झूलनी सामन Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 25, 2023 झूलनि सामन रीत हो सजनी। बरसत बदरा उमड घुमड बहि,अंतर हठी मेल बात कौ सजनी। भीजत साज सिंगार गात सब,भीजत हिय हित प्रीत सो सजनी। जावत छोर ओढनी उर बँधिकै,सरसत जई झौट खात वौ सजनी। नैननि लेत सिरात हिय "प्यारी", मुस्कनि संग झुकी जोट जो सजनी। Read more