झूलनी सामन

झूलनि सामन रीत हो सजनी।
बरसत बदरा उमड घुमड बहि,अंतर हठी मेल बात कौ सजनी।
भीजत साज सिंगार गात सब,भीजत हिय हित प्रीत सो सजनी।
जावत छोर ओढनी उर बँधिकै,सरसत जई झौट खात वौ सजनी।
नैननि लेत सिरात हिय "प्यारी", मुस्कनि संग झुकी जोट जो सजनी।

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