मौहै जानि ना कदि अपनी।ज्यू बालक खेलत खेल खिलौने,माटी ढोल गेंद ढफ ढफली।कदि बोलत बोल ना‌ मीठै सलौने,दुराई सदा आजु दुरै कलही।प्यारी" हारी अब करि करि बिनती,काटै दिन रौवै अब सबही।

मौहै जानि ना कदि अपनी।
ज्यू बालक खेलत खेल खिलौने,माटी ढोल गेंद ढफ ढफली।
कदि बोलत बोल ना‌ मीठै सलौने,दुराई सदा आजु दुरै कलही।
प्यारी" हारी अब करि करि बिनती,काटै दिन रौवै अब सबही।

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