अवतरै श्री राधारमन

अवतरै श्रीराधारमण आज।
पुलकित मंज्जरी किंकरी सखिन,पुलक ह्रदय सुख संत समाज।
अनुपम रूप छबि मदमाती,शीतल होय निरखि मुख ताप।
चटिकाय अंगुरी तोरि तृण निरखौ,"प्यारी" हृदय सिंहासन कियौ विराज।

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