श्रीराधारमण मन पावस

श्रीराधारमण मन पावस भाई।
चपला नागरी घन नागर संग,लिपट चिपट अति अति दमकाई।
द्रुत गति कदि मन्दित स्वर गर्जन,रस बूंदनि अंग स्वेदा बरसाई।
शीतल भए घन द्युति कनक कामिनी,निरखि "प्यारी"मनौ मन हरषाई।

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