प्यारै पिय

प्यारै पिय !ऐसी का कीन्ही करनी।
गिरी सम भार धरयौ उर मौरे,नैननि जु  दीन्ही जमुना भरनी।
छब झलकी पल चल चित्त चंचल,छनिकही आय जाय सब सपनी।
होओ नाही नाही होओ सबही,जानू नाय साँची झूठी कथनी।
"प्यारी" बिगारी  बात बनत सब,छाडी दई अधर बीच जलनी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया