उर चंदन करि

उर चंदन करि लाड लडाऊ।
सुभग सलौनै दोऊ लाल लाडिलै,निज कर सौ अंग अंग फैराऊ।
ताप शाप सब बिरहा हरिकै,हरि हर कौ हर बार पेहराऊ ।
शीतल करौ अब नाथ मोहि कौ,"प्यारी" कछुक काम तौ आऊ।

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