हाय सखी
हाय सखी ! देखै न राधारमण।
नैन चुरौयै फिरतै मौ सौ,नाय पतौ कौन कारण।
आई नाय मिलनौ या सौ,अरी रूठै योई संभावन।
करी नाय सुनि बतिया ह्यौ,कछु दिना सौ भावन।
ऐजी सुनौ अबिकै छाडी दौ,होय नाय पुनि दोहरावन।
"प्यारी" परत पाय बिनती हतौ,दासी नाय दीजौ बिसरावन।
Comments
Post a Comment