पुकारूँ श्रीरमण

पुकारू श्रीरमण भरि भरि नयन।
कोठै अटारी धरणी याए सेज,चढी पडी निहारू राह सजन।
भूली बिसारी मिलनी बात कोई,रही याद एक बिरहा तपन।
तौ छलिया छल कीजौ न मौसौ,पहलौई छली ह्यौ तौ भाग बैरन।
आवौ जो गिरधर बात बनै ताई,ना तौ मरि जाय "प्यारी" बिरहन।

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