धन जीवन

धन जीवन इन्ही कै भाग।
चंदन अंग अंग जोई लिपटै,करि निछावर अपनपौ आप।
मौतिन माल मुकुट सब लटकनि,अरू मोर पखा सजियौ पाग।
नुपुर कहै कौन मुख रसना,चूमत चरण निशि भौर सौ रात।
लकुटि बन्यी काठ जिन तरूही,मानौ सुफल उन्हीकोई गात।
"प्यारी" कछुक जतन करि अबही,कहा योई जीवन विरथ बितात।

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