गोवर्धन गिरिधारी रे

गोवर्धन गिरधारी रे,मोहै भावै कुंज बिहारी रे।।
पखा मोर मुकुट लटकन लट अलकन,परी घूंघर कारी कारी रे।‌।मोहै भावै०
नक बेसर तिलक भाल टीकौ चंदन,कारै कपोलन फैरी लाली रे।।मोहै भावै०
फबी गल बनमाल अधर मुरली धर,बही मधुर बयार सुर वारी रे।।मोहै भावै०
लचक मचक अचक कछु आडी टेढी,चलै चलनि चाल गज वारी रे।।मोहै भावै०
मोहित मोर मृग शुक पिक केकी,री"प्यारी" मोहन मोह सब हारी रे।।मोहै भावै०

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