नहि मौन धरौ

नहि मौन धरौ,कछु बात करौ।
भई रार जई नहि बात नई,तजि भूलौ बिसरौ,उर हाथ धरौ।
अंतर उपवन बंजर सम वन,फागुन लावौ नेह लाड करौ।
अंचर ढरकि मनुहार करी,नाहि तजि जावौ आय बाँह वरौ।
प्रीतम सैय्या दै गलबैय्या "प्यारी" झुकि झुकि मनुहार करौ।

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