गोद लयी बैठी
गोद लयी बैठी
गोद लयी बैठी जुगल चरण सखी।
भावित हरषित अतीहि हुयी,पुलकित नयन बहत रही।
गौर श्यामल चरण दुई,जावक पायल सजत रही।
चूमत धरत माथ कदै,कबहु पलक सौ झारत रही।
कोमल बसन पलोटत भयी,चरण अति कोमल सेवत रही।
भाग ऐसो दासी जगिहै,कबहु दरस पिय प्यारी पही।
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