बैद्य क्या जाने

बैद्य क्या जाने
बैद्य पकड क्या नबज जानिहै,जानै साहिब मौर।
प्रेम रौगि दासी साँवल कौ,हिय चरणन पायी ठौर।
कौन दवा करै काज रौगहु,कौन बढ्यी मिटावै पीर।
दरद बढै बढै पीर रैन दिन,लावौ ऐसौ बैद्य कौऊ बीन।
बस कौऊ कौ नाय चलै म्हारौ पै,दासी साँवलिया आधीन।

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