राम रट

राम रट
राम रट,अरी मोरी रसना।
साँचौ जगत नाम इकही,सब जानिहौ तुव सुपना।
भव सिंधु नैन मीच तरिहौ,राम संग भव ही तरना।
नाम अमोलक जगत जानौ,राम रहै नाय जग फसना।
रस सागर रस देवन हारी,बात साँची रै जनना।
राम राम रट बिसार न कबहु,प्यारी राम नाम रटना।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया