कालिन्दी जु सेवा

कालिंदी जु सेबा
कलिंदि अंक बिलसै राधा मोहन।
दुई रस पगै,करे अंक बिलासा।
निरखि निरखि,नैन पीवे रूप सुधा सा।
कमल पुष्प दुई,कर नीकौ जानौ।
खोये नैनन बिम्ब,भये एक मानो।
सखीन संधि किये,युगल करी होई।
हिय बिलसत कुंज,अनूप माहि दोई।
रूप सुधा पीवै,नैन न अघावै।
बलि बलि ऐसौ,प्यारी रूप जावै।

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