कंदमन शाख

कंदमन शाख
ठाडी कंदमन शाख पकरि राधै।
शाख झुका छिपि निरखै साँवरौ,पुनिहि पाछै शाख छिपिहै।
हौवत बिकल राधिकै टेरतौ,हसि निरखी नाहि श्वास कढिहै।
थकित चकित हौहै बैठिहौ,आय नागरि नैन मुंदिहै।
लिपटि बहतौ भुज कसिहि,रस नेह बदरा सबहि ढुरिहै।
पदचाप दाबिहै ठाडीहौ सखिन,रसप्रेम लीला नैन निरखिहै।
दिजिहौ दासिन कबहु दरस जु,बारि बारि बिनती दासी करिहै

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