भजन बिनु

भजन बिनु
भजन कौन बिधि मनहु लगै।
जनम विरथ होय पाछे मनवा,लागै नाही भजन मे।
मनहु दोष धरू काय प्यारी,जे लागे निज प्यारन मे।
तोकू हु प्यारो जगहु लागे,तबहु ना आवे जोरी मन मे।
जौन दिना लागे जग झूठ्यो पिय प्यारौ,मन हटाये हटे न चरणन ते।
पिय प्यारो जान नाम समाये,नेक टेर तो सही निज मन मे।
तुरत प्रकट जोरी हिय होहि,नाय परे ढूंढन जग बन मे।
ऐसेहु कृपा प्यारी पे होहै,रह जावो आप आय मन मे।

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