स्वप्न
स्वपन
सखा मधुमंगल सुपन बखानै।
सुन कनुआ कल कहा भयो रै,रैनहु दैख्यौ सबै सखा रे।
पूछ हाथ लौ लांबी निकरी,हम सबहि बानर हुआा रे।
अरे इतनोई नाय जे म्हारो कनुआ,जेई बानर धमाल भया रे।
सबरे हसे देख दूसर कू,फाड आँख कोऊ कोऊ खडा रे।
इतनेई धम्म गिरौ खटिया सो,अचरज मोय हुआ बडा रे।
हाथ टटोल हम पूछ देखिहौ,मारे डर बुरा हाल हुआ रे।
सुनि सखा संग कनुआ खूब हासे,प्यारी पुनि धमाल हुआ रे।
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