प्रीति रीति

प्रीत रीती
प्रीत रीती किशोरी सिखा दीजिए।
नेहा जग सो हटे प्रीत तुव सो जुडै।
कोउ नाहि दीखे नैन जौरि बसै।
ऐसी भिक्छा प्रेम की कृपा दीजिए।
आस सबसौ तोर संग तौरे जौरि।
पड्यी चरणन माहि नेक नाहि उरि।
करि दासी प्यारी बिठा लिजिए।
बिन नाम नाहि टूक श्वास आवै।
श्वास आवै तबै जबै नाम आवै।
ऐसी अास सुनिहै पुरा दीजिए।
मम प्राण अधार बनौ लाडली।
दासी अपनौ महल कौ करौ स्वामिनी।
रति प्रेम टहल सौ जुडा दिजिए।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया