श्याम रँग
श्याम रंग
मेहंदी हल्दी रंग चढैस्यु नाहि उतरै रंग मैरौ श्याम जी।
तन पिय कोउ चाहै होवै,मन पिय एकौ आप जी।
रंग रंगाय दैवै जग चाहै जैसौ,रंग छूटिहै नाहि पिय श्याम जी।
जानत जग झूठी कहू ना बाता,चढै दूजौ रंग नाय श्याम जी।
मैरौ प्रीत सुहाग धनी जैई,जैई भयै मैरौ भरतार जी।
आय बेगि दासी अपनावौ,बैठि आस करत दिना साँझ जी।
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