सखी महिमा
सखी महिमा
जानिहौ युगल प्यारी आली।
दुई खिलौने युगल इन्ही के,मनावत मनहु एक करि डाली।
रूप रंग बसन भूषन सबै,धरावै एकहु सम समान करा री।
नित नेह हिय कौ साध पूजावै,डारत नेह सबहि हिय जो भरा री।
ज्यौ डोरी सखी हौय जानिहौ,वाकौ एक छौर लला ता एक लली हौयी।
जानिहौ पुष्प युगल कौई जौ रै,सुगंधि पुष्प कौ सखीन ही हौयी।
बिलग कौउ सौ करि नाय जावै,रचे बसै सखी युगल हुई जायी।
आसरौ लए ऐसौ सखिन कौ प्यारी,बाता कछु नित सखिन कौ गायी।
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