बहै नैन
बहै नैन
देखि किरपा बहै नैनहु गिरधर।
बिनती करती अकुलात दैखि,दैखि गयी नाहि तौ सौ।
आय मिलिहै तुव हियही,ढूंढत रहही इत उत सब लौ।
कैसौ कहहु निरमोही तोय,बेरि बेरि करि किरपा सब सौ।
गिरत नैन सौ अश्रु एकही,बेगि आय संभारिहो हम हौ।
हाय! बावरी ढूंढै कहा तौ,पिय बैठे तेरो ही हिय सौ।
ऐसौ प्यारो पै प्यारी बलि जए,जावै बारि बारि किरपा लौ।
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