कौन मौरा
कौन मौरा
कौन मौरा गिरधर तुम बिन अपुना,साँचो इक तुव जगत सब सुपना।
झूठौ जनम विरथ गमायौ,साँची हुयो जबै जाद तुव आयौ।
नाही मौरा कौउ,तुव ही अपुना।
देखि देखि जग रोवनो सूझै,बिनहु पिय सब सूनौ लागै।
संगै ले जावौ,झूठौ तोरिहौ सुपना।
जतन बतावौ जौ तुव पावू,सबहु छूटै इक तुव चाहू।
मिलै संग तौरा,लिखौ लेख ऐसौ विधना।
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