सखा बैठक

सखा बैठक
बैठक लगायी मिल सबै सखा।
सुबल श्रीदामा बैठे दाई बाई,मधुमंगल कौ पेशी लगाई।
सुन माधो अपराध पेटू कौ,हमरौ यानै भोजन खाई।
आज लौ घर सौ लाय न कछु ही,जिम्मे हमरे माल उडाई।
आजु दंड जे भारी पावै,पुनि जाई घर सौ भोजन लाई।
चतुर सुजान भली जुक्ति किन्ही,छाछ मटुकी माट भर धाई।
आजहु बरत सबहिन करि पडिहै,दंड देय कौ आप पछताई।
देख हाथ पेटहु फेरे,प्यारी दंड बड्यौ भर पाई।

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