पीर मिटे

पीर मिटै
हिय जरयौ कैसौ पीर मिटै।
दीखै नाहि पिय दूरि दूरि लौ,करत करत मनुहार छकि है।
हसनौ कदै नाहि मोहै भावै,रौबत रौबत नैन दुखै है।
रहतौ उदासी रैन दिनु हौ,पूछिहै जग तौ कहा कहि है।
कैसौ कहवौ पिय नाय आवौ,पिय कौ बनि सौ मौरि बनी है।
करिहौ कछु तौ दासी पै किरपा,बिनु दरस प्यासी प्यारी मरिहै।

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