कृपा विनती

कृपा विनती
कृपा करो आपनी ओरहु देख।
मै मतिहीन,कुमति अधम हौ,आप अकारण करूणाकारी।
भवसिंधु हम जानत न तरनौ,आप कुशल खेवनहारी।
हम शूकर विष्ठा मुख मारत,आप सुधा पिवावनहारी।
विषय विकार हमहु बड्यो भावत,तुम इनसो छुडावनकारी।
दयामयी करूणाकर प्यारौ,कैसौ कहवै किरपा आप प्यारी।

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