नांगौ कन्हाई

नांगौ कन्हाई
चौपाल घूमत नांगौ कन्हाई।
अलक घूंघर छौटौ केशा,मोर पखा मोतिन मुकुट फसाई।
करधनी बड्यी सुहावन सोहै,पायन नुपुर छन छनाई।
नील बरण शौभा अतिहि भूषण,चमके रंग बिरंग नगाई।
बिसरी सुधि गोपिन की अजहु,बिनहु बसन दैखिहै कन्हाई।
गोपिन नेक माखनहु पै,दैखिहौ कैसौ नाच नचाई।
मिलत लौना खावत लाला,अंगुरि गोपिन ओर बढाई।
दैख सरलता चपल मोहन कौ,प्यारी बारि बारि बलि जाई।

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