कारौ चंद
कारौ चंद
माई ब्रजचंद!दिनु दीखै।
कारौ चंद कैसौ गढिहौ,हिय निकिरै नाहि निकिरै।
नैन रोगी कारौ रौगी,दिनु बिसरौ रैन बिगरै।
देखि जबसौ बौराई,रौवू रौवू घरै बिसरै।
कौउ टौना डारि दिन्हौ,कारै धसिहै कैसौ हियरै।
जावू बैद्य कौउ झाडै,देवै जौगि भभूति कोउरै।
भौरी गौपी नाय जनिहै,जै जाकौ लगिहै नाहि उतरै।
करौ किरपा प्यारी चढिहौ,बसौ जौरि आन हिवरै।
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