करिहु टौना

करिहु टोना
रसिक रसलाल पै करिहु टौना मै।
करिहौ कछु बंशी लई लैहु,नचावू बंशी कौ ताल पै।
सखी री पखा मौर लई लैहु,लगाय दैहु घूंघटा ही मुख पै।
देऊ बूटी कौउतौ या कू,डौलतौ पाछै पाछै भाजै।
या कछु ऐसौ टौक मारू,बैठाय लैहू कर सो कर पकरै।
जावै माखन चुरावै कू,संगै मौय लइकै ही जावै।
देखिहै पनघट जावती कौ,भ्रमर सौ डौलतौ धावै।
कछु करिहु जतन ऐसौ,बैरि बैरि आयकै न जावै।
सखिन कौ सुनिकै हिय मैरौ,ऐसौ बूटी ढूंढनौ च्हावै।

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