बाल हठ

बाल हठ
बाल हठ रस सो रसिलौ कौ।
चंद चंद माई मोहे दीजै,मचल गयौ हिय श्याम लला कौ।
सुनै ज्यौ नाही देखत माई,धौस अनोखेही माई दीन्हौ।
अंग रमाऊ जमुना कौ रेती,चौटि तौ सौ नाय गुथाहौ।
माखन ना खावू खावन न दैहू,दूध कजरी नाय पीवौ।
सबहि कहु नाय लाल माई को,नंद लाल ह्यै जावौ।
रूठ बैठिहो देख्यौ लाला,बात बहू कौ माई कहयौ।
बातन तुतली बाणी बलिहारी,प्यारी गोद माई बैठायौ।

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