दीपोत्सव

दीपौत्सव
कुंजन हौहिहै आजु दीपौत्सव।
भाँति भाँति रंग नवरंग,दीप नवकृतिकै।
पग डंडी तीरै तीरै,सजिहै तमाल नीचै।
झरौखेहै दीपमाल सजिहै,सजिहै द्वार निकुंजै।
गौलिहि फुवारै चबूतरौ,दीपौ दीप धरिहै।
खिलिहै कुमुद मध्ये,दीप मछरी जैसौ जरितै।
भई दीवाली जैसौ अजहु,कुंज दुल्हिन बनियै।
बनि जाहू कौऊ दीप हौऊ,जुगल मौद नैन चखिहै।

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