राधिके प्रीत बही

राधिके प्रीत बही
धीर धरिहि राधिके, अजहु प्रीत बही।
उमगि सिंधु ढुरि लाल पै,रसलाल लाल भई।
चितवनि रस सिंधु सरिता,चित्तचौर नैन लई।
अधर रससार सिंधु कोटर,रसराज अधर दई।
कटारि नैन तिरछी चलिहि,उर लाल बिहर गई।
छाड लाज बिसरि सखी,बरस उर प्यारी पई।
देखि बिलस नग नागरि,सखिन जहा तहा ढई।
बहवतौ रस सोई कुंजै,हिय कुंजै बिलसै दुई।

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