दशा बुरी
दशा बुरी
हमरी दशा है बुरी।
ज्यौ बानर मणिक हीरा पावै,काँच जानैहि तोड धरी।
मुसिका बसन ज्यौ मोल न जानै,अरी गूदडी काट करी।
बिनु रसना ज्यौ कछु ही पावौ,स्वाद ना जानि परी।
हिरनी कस्तूरी पाछै भागत,ज्यौ जानै न पेट धरी।
तैसेई किरपा सबहि पायौ,स्वाद न जनै प्यारी।
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