अष्टदल कुमुद
अष्टदल कुमुद
अष्टदल कुमुद रसै दैवत, बेगि मिलनौ जुगल जौरी।
एैकेहु पंखुरि बैठिहौ नाहि,चलिहै पहुचत ओर जौरी।
सखि अनुगत सैबा करिहै,सबै टहल रूचै पूरी।
हौहि किरपा हौई जौरी,पग उठिहै मग दैहरी।
नित सैबा नित रहिहै,नित अनुचर दासी तौहरी।
कछु नाहि जानै दासी,होय जौई किरपा तौरी।
लिखौ जानै कौन कहा,लिखै ह्रदय बैठि जौरी।
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