नयन शोभा वर्णन पद

नयन शोभा वर्णन पद
मधुसिक्त मनोहर रतनारे,उन नैनो की अहो क्या कहिए।
कोऊ लता पता सम उरझावै,इन शरण न गहे तो क्या गहिए।
मटकन सुघराई नैनन की,बैनन की पूछो बात नही।
चंचल चितवन चतुराई प्रिये,संग धारा इन को क्या बहिए।
पलकन मानौ सैनानी है,दुई बैन भरै इन नैनन को।
ऐसै मतवारै नैनन पे वारै,कछु बात कहो अजी क्या दइए।
जब सो लखै नैनन कोर सखी,सुधि जन धन नाय आवत है।
कछु रहे कछु नाही अरी प्यारी,तज नैनन नाही कछु अब चहिए

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