स्वप्न पद

स्वपन पद
सुनि सखी श्याम को आवन बात।
सुन्दर रूप मनोहर देख्यौ,देखी सखी कल रात।
औचक पडी सुनिही सखी,मोहै कही जो श्याम सखी।
ऐको कर सो कटि पकरि,एकौ कूच मोरे रखी।
कहै सुंदर गोपी बडै दिनन कौ,राह तेरी दैख्यी।
आजु हाथ आयी मैरौ,आयौ घडी शुभ बड्यी।
कहत कहत री सबै टटोल्यौ,कर हर ओर धरी।
ऐसी मनहारी लीला प्यारी,नैन कदसौ धरी।

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