गगरिया फोरी
गगरिया फोरी
अरी! मोरी फौरी गगरिया ही,दधिहु सब बिखराई री।
छिपत ओट कदंबहु ठाठौ,साध निशानौ कंकरिया मारी।
लगत तड् सौ टूटिहै मटुकी,उपरि मैरो दधि बिखारी।
निकारि दात हसिहै दारी कौ,नेक लाज ना आई री।
कूदिहै कदंब सौ करत बिगारी,आवत दैखि मोय मुरारी।
दिखाय अँगूठौ भगिहै दूरि,चिढ चिढावत तारे मौरी।
मै जरू और जौरि हसिहै,अरू सींग बनायौ री।
चाह्वू ऐसौ दरस हु करवै,बिनु दरसन हियहु तरसै।
नैनन दीजौ ऐसौ मोय,कबहु लाल हमहु पै बरसै।
पावू दरस कदी,प्यारी कौ नैन दिरावौ री।
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